लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

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राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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‘कह दें तो कौन मना करेगा, सरकार के मालिक जैसे हैं’—मोहन भागवत के भारत रत्न बयान पर चंद्रशेखर आजाद का तीखा हमला, सम्मान की राजनीति पर सीधे सवाल

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मोहन भागवत के भारत रत्न बयान पर प्रतिक्रिया देते नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद, सरकार और सम्मान की राजनीति पर सवाल उठाते हुए बयान देते हुए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने संबंधी बयान पर उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Chandrashekhar Azad Ravan (चंद्रशेखर आज़ाद रावण) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बयान को लेकर सरकार की भूमिका और सम्मान नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है और कोई भी किसी के लिए पुरस्कार की मांग कर सकता है, लेकिन मोहन भागवत की स्थिति सामान्य व्यक्ति जैसी नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “भागवत सरकार के मालिक जैसे हैं, ऐसे में उन्हें किसी से मांग करने की जरूरत ही क्या है। अगर वे कह दें तो भला कौन मना करेगा।”

नगीना सांसद ने आगे कहा कि देश की आजादी और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में किसका कितना योगदान रहा है, यह इतिहास में साफ तौर पर दर्ज है और किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महापुरुषों के योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई के आधार पर होना चाहिए।

चंद्रशेखर आजाद ने दोहराया कि उनकी पार्टी लंबे समय से बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने देश की राजनीति और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी और वंचित, दलित व बहुजन समाज को संगठित कर उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़ा किया। उनका योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक मजबूत आधारशिला था।

इसके साथ ही उन्होंने 1857 की क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग दोहराई। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि ऐसे वीरों और महापुरुषों को उचित सम्मान न देकर सरकार उन समुदायों का अपमान कर रही है, जिनसे ये महान व्यक्तित्व जुड़े रहे।

नगीना सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि समाज इस उपेक्षा को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर सरकार ने इन महापुरुषों को सम्मान देने की मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। उन्होंने कहा कि “हमारे लोग यह अपमान सहन नहीं करेंगे और वोट की ताकत से इसका जवाब देंगे।”

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