Nitin Nabin आज भरेंगे बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का नामांकन, बिहार से पहली बार मिलेगा शीर्ष नेतृत्व, जानिए इतनी तारीख को होगा औपचारिक ऐलान

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नितिन नबीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के नामांकन से पहले

भारतीय जनता पार्टी (BJP) में आज एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Nitin Nabin (नितिन नबीन) आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 20 जनवरी 2026 को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

इस घोषणा को आगामी चुनावी चुनौतियों से पहले पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नेतृत्व को लेकर स्पष्टता आने से राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की रणनीति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

बिहार से पहली बार बनेगा बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष

नितिन नबीन के नामांकन को लेकर भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि यह पहली बार है जब बिहार से कोई नेता देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को नामांकन दाखिल किया जाएगा, जो पार्टी की तय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

यह बिहार के राजनीतिक इतिहास के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।

45 साल की उम्र में मिलेगी देश की सबसे बड़ी पार्टी की कमान

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा—ने सर्वसम्मति से नितिन नबीन के नाम पर मुहर लगाई है।
45 वर्षीय नितिन नबीन के हाथों दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की कमान सौंपे जाने को भाजपा में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

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बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे नितिन नबीन

बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने इसे पार्टी के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि नितिन नबीन अब तक के सबसे युवा बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी उनके नेतृत्व में एकजुट होकर आगे बढ़ेगी।

नामांकन से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय को बैनर, होर्डिंग्स और रंगीन लाइटों से सजाया गया है। सोमवार को पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के मुख्यालय पहुंचने की संभावना है।

एक महीने पहले संभाला था राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद

गौरतलब है कि 15 दिसंबर 2025 को नितिन नबीन ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभाला था। वे एक अनुभवी संगठनकर्ता हैं और पांच बार के निर्वाचित विधायक रह चुके हैं।

युवा मोर्चा से लेकर राज्य सरकार में मंत्री पद और राष्ट्रीय संगठन की अहम जिम्मेदारियों तक, उनकी राजनीतिक यात्रा अनुशासन, परिश्रम और जनविश्वास की मिसाल मानी जाती है।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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