BMC Election 2026 Result: BJP के नवनाथ बन कौन हैं? जानिए उनके जीवन, राजनीति और जीत की पूरी कहानी

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

“BMC Election 2026 Result में BJP उम्मीदवार नवनाथ बन की जीत के बाद की तस्वीर, मुंबई नगर निगम चुनाव 2026”

BMC Election 2026 Result: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी नवनाथ बन (Navnath Ban) ने उल्लेखनीय जीत दर्ज कर नगर राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। उनकी यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और वर्षों की मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।

नवनाथ बन को एक जमीनी, सुलझे हुए और आम लोगों से सीधे जुड़ने वाले नेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने राजनीति को सत्ता का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना है। यही कारण है कि चुनाव प्रचार के दौरान वे बड़े मंचों से ज्यादा गलियों, सोसाइटियों और स्थानीय बैठकों में नजर आए।

सामाजिक जीवन से राजनीति तक का सफर

नवनाथ बन का सामाजिक कार्यों से पुराना नाता रहा है। वे लंबे समय से अपने क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं, साफ-सफाई, पानी की समस्या, सड़क मरम्मत और गरीब तबके से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे समस्या सुनने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाधान तक साथ खड़े रहते हैं।

BMC चुनाव 2026 में रणनीति और जनता का भरोसा

BMC चुनाव 2026 में नवनाथ बन ने घर-घर संपर्क, सीधा संवाद और विकास के स्पष्ट एजेंडे को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने चुनावी भाषणों में बड़े वादों की बजाय स्थानीय समस्याओं के ठोस समाधान पर जोर दिया। मतदाताओं ने उनकी इसी सादगी और ईमानदार प्रयास को समर्थन दिया।

जीत के बाद क्या बोले नवनाथ बन

चुनाव में जीत के बाद नवनाथ बन ने कहा,
“यह जीत मेरी नहीं, बल्कि मेरे क्षेत्र की जनता की जीत है। लोगों ने जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरना मेरी पहली जिम्मेदारी होगी।”

Also Read

उन्होंने साफ किया कि नगर निगम में उनकी प्राथमिकता पारदर्शी कामकाज, समय पर समाधान और जनता से सीधा संवाद होगी।

व्यक्तिगत जीवन और सोच

नवनाथ बन का निजी जीवन बेहद साधारण है। वे मानते हैं कि नेता वही सफल होता है जो जमीन से जुड़ा रहे। राजनीति में आने वाली चुनौतियों को वे अवसर के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि स्थानीय स्तर पर ईमानदार काम ही असली विकास की नींव है।

Next Post

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

Next Post

Loading more posts...