IPAC रेड केस में ED को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक, 3 फरवरी को अगली सुनवाई

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Javed Haider Zaidi

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IPAC रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक से जुड़ी खबर की प्रतीकात्मक तस्वीर

IPAC रेड केस में ED को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: IPAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से जुड़े रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अहम निर्देश भी दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड, खासकर सीसीटीवी फुटेज, पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच और सुनवाई के दौरान किसी भी तरह के सबूत से छेड़छाड़ न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस FIR के आधार पर ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इस मामले में अदालत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बंगाल के डीजीपी, पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। सभी पक्षों से मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

कोर्ट ने बताया कि इस केस की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। उस दिन सभी संबंधित पक्षों के जवाब और रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद आगे की दिशा तय की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

IPAC रेड से जुड़े घटनाक्रम के बाद ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। ED ने इसे अपने काम में बाधा और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा गंभीर मामला बताया था, जिसके बाद एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब शीर्ष अदालत के इस फैसले को ED के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

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कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न सिर्फ जांच एजेंसियों के अधिकारों से जुड़ा अहम संकेत देता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच टकराव के मामलों में संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजरें 3 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में अगला बड़ा मोड़ आ सकता है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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