ITR Refund Delay: 50 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स अब भी रिफंड का इंतजार, जानिए देरी की वजह और आगे क्या करें

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

इनकम टैक्स रिफंड में देरी को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य, कंप्यूटर स्क्रीन पर इनकम टैक्स पोर्टल खुला हुआ, टैक्सपेयर्स रिफंड स्टेटस चेक करते हुए, फाइल और दस्तावेजों के साथ ऑफिस डेस्क का सामान्य दृश्य

ITR Refund Delay (ITR) फाइल करने के बाद रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों टैक्सपेयर्स के लिए अब भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। आकलन वर्ष 2025-26 में करोड़ों रिटर्न प्रोसेस होने के बावजूद 50 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स को अब तक उनका रिफंड नहीं मिला है। लंबे समय से रिफंड अटके होने के कारण लोग लगातार इनकम टैक्स पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में रिटर्न अभी भी “प्रोसेसिंग” की स्थिति में दिख रहा है।

कितने रिटर्न फाइल हुए और कितने पेंडिंग हैं

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 11 जनवरी तक आकलन वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 8.8 करोड़ ITR फाइल किए जा चुके हैं। इनमें से 8.68 करोड़ रिटर्न वेरिफाई हो चुके हैं और 8.15 करोड़ रिटर्न प्रोसेस भी कर दिए गए हैं। इसके बावजूद, गणना करें तो करीब 53 लाख रिटर्न अब भी प्रोसेसिंग के लिए पेंडिंग हैं। इन पेंडिंग रिटर्न्स में बड़ी संख्या उन टैक्सपेयर्स की है, जिन्होंने रिफंड क्लेम किया है।

क्यों इस बार रिफंड में ज्यादा देरी

टैक्स जानकारों के मुताबिक, इस बार रिफंड में देरी का सबसे बड़ा कारण आयकर विभाग द्वारा जांच प्रक्रिया को सख्त किया जाना है। खासतौर पर उन मामलों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें रिफंड की रकम अधिक है या डेटा में कोई असामान्यता दिख रही है।

आयकर विभाग ने रिस्क-बेस्ड रिव्यू की संख्या बढ़ा दी है। इसका मतलब यह है कि जिन रिटर्न्स में इनकम, टैक्स डिडक्शन या टैक्स क्रेडिट से जुड़ा डेटा सामान्य से अलग दिखता है, उन्हें ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग से हटाकर मैनुअल जांच के लिए भेजा जा रहा है। इससे रिफंड जारी होने में स्वाभाविक रूप से ज्यादा समय लग रहा है।

AIS और फॉर्म 26AS से हो रहा है मिलान

इस साल रिटर्न प्रोसेसिंग के दौरान AIS (Annual Information Statement) और फॉर्म 26AS से डेटा का मिलान पहले से ज्यादा गहराई से किया जा रहा है। यदि टैक्सपेयर्स द्वारा बताई गई इनकम और बैंकों, नियोक्ताओं या म्यूचुअल फंड्स द्वारा रिपोर्ट की गई इनकम में अंतर पाया जाता है, तो सिस्टम अलर्ट ट्रिगर कर देता है। ऐसे मामलों में रिटर्न अपने आप रुक जाता है और दोबारा जांच की जाती है।

Also Read

NUDGE पहल के कारण बढ़ी जांच

रिफंड में देरी की एक और बड़ी वजह CBDT की NUDGE पहल का दूसरा चरण है। इसके तहत टैक्स अधिकारी अब AEOI (ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन) डेटा का उपयोग कर रहे हैं। इस डेटा के जरिए उन मामलों की पहचान की जा रही है, जहां टैक्सपेयर्स ने विदेशी आय या विदेशी संपत्ति की जानकारी ITR में नहीं दी हो।
जिन रिटर्न्स में ऐसे संकेत मिलते हैं, उन्हें अतिरिक्त वेरिफिकेशन के दायरे में लाया जाता है, जिससे प्रोसेसिंग और रिफंड में समय लग रहा है।

डेडलाइन बढ़ने से बढ़ा सिस्टम पर दबाव

आकलन वर्ष 2025-26 के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख दो बार बढ़ाई गई थी। पहले यह तारीख 31 जुलाई थी, जिसे बढ़ाकर 15 सितंबर किया गया और फिर एक दिन और बढ़ाकर 16 सितंबर 2025 कर दिया गया।
डेडलाइन बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स ने आखिरी दिनों में रिटर्न फाइल किए। सितंबर में अचानक बढ़ी फाइलिंग की वजह से आयकर विभाग के सिस्टम पर दबाव बढ़ा और प्रोसेसिंग का बैकलॉग बन गया।

जिनका रिफंड अभी तक नहीं आया, वे क्या करें

अगर आपने समय पर ITR फाइल कर दिया है लेकिन रिफंड अभी तक नहीं मिला है, तो विशेषज्ञ कुछ जरूरी कदम उठाने की सलाह देते हैं।

सबसे पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपने ITR का स्टेटस नियमित रूप से चेक करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपका बैंक अकाउंट पूरी तरह से वैलिडेट और प्री-वेरिफाइड हो, क्योंकि बैंक डिटेल्स में गलती होने पर भी रिफंड अटक सकता है।

इसके अलावा, आयकर विभाग की ओर से आने वाले किसी भी ईमेल या SMS नोटिफिकेशन को नजरअंदाज न करें और समय पर उसका जवाब दें। अगर रिटर्न में इनकम या टैक्स क्रेडिट से जुड़ी कोई वास्तविक गलती सामने आती है, तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

क्या आगे भी लग सकता है समय

जानकारों का मानना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेंडिंग रिटर्न्स धीरे-धीरे प्रोसेस किए जाएंगे और रिफंड जारी होंगे। हालांकि, जिन मामलों में डेटा मिसमैच या अतिरिक्त जांच की जरूरत है, उनमें थोड़ा और समय लग सकता है।

कुल मिलाकर, इस साल ITR रिफंड में देरी की वजह सिस्टम फेल होना नहीं, बल्कि सख्त जांच, अतिरिक्त वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड संख्या में फाइलिंग है। टैक्सपेयर्स को सलाह दी जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और अपनी तरफ से सभी जानकारियां सही और अपडेट रखें, ताकि रिफंड जल्द मिल सके।

Next Post

PPF निवेशकों के लिए अहम खबर: अप्रैल में इस तारीख को भूलना पड़ सकता है महंगा

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

"PPF निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अप्रैल में जरूरी तारीख की जानकारी, सही समय पर जमा करने पर ज्यादा ब्याज, देर से निवेश करने पर नुकसान, PPF की ब्याज दर और फायदे, सुरक्षित लंबी अवधि की निवेश योजना, 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करने के लाभ।"

अगर आप सुरक्षित और लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आपके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह सरकारी योजना न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रखती है, बल्कि समय के साथ अच्छा रिटर्न भी देती है। लेकिन PPF में निवेश करते समय एक छोटी-सी तारीख की अनदेखी आपको सालभर के ब्याज में नुकसान पहुँचा सकती है। खासतौर पर अप्रैल महीने में यह बहुत अहम है।

PPF में निवेश का सही समय क्यों है जरूरी?

PPF में ब्याज की गणना हर महीने 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर होती है। इसका मतलब साफ है:

  • अगर आप 1 से 5 अप्रैल के बीच निवेश करते हैं, तो आपको उस महीने का पूरा ब्याज मिलेगा।
  • लेकिन अगर आप 5 अप्रैल के बाद पैसा जमा करते हैं, तो ब्याज केवल अगले महीने से जुड़ना शुरू होगा।

यानी सिर्फ कुछ दिनों की देरी भी आपके सालभर के रिटर्न को कम कर सकती है।

देरी से निवेश करने पर कितना नुकसान हो सकता है?

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने PPF अकाउंट में 1.5 लाख रुपये जमा किए।

  • अगर राशि 1 से 5 तारीख के बीच जमा होती है, तो सालाना ब्याज लगभग ₹10,650 होगा।
  • वहीं, अगर आप 5 तारीख के बाद निवेश करते हैं, तो सालाना ब्याज घटकर लगभग ₹9,763 रह जाता है।

यानी केवल एक दिन की देरी से लगभग ₹887 का नुकसान हो सकता है।

यह नुकसान छोटा लग सकता है, लेकिन PPF लंबी अवधि की योजना है, इसलिए समय पर निवेश करने से लंबे समय में काफी बड़ा फर्क पड़ता है।

PPF योजना के फायदे और खासियतें

PPF योजना को खासतौर पर सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोग पसंद करते हैं। इसकी कुछ मुख्य खूबियां हैं:

  • लंबी अवधि का निवेश: 15 साल
  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹500
  • अधिकतम निवेश राशि: ₹1.5 लाख सालाना
  • ब्याज दर: करीब 7.1% (वर्तमान में)
  • टैक्स लाभ: धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री

यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो बिना जोखिम लिए लंबे समय में अच्छा फंड बनाना चाहते हैं।

निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. कोशिश करें कि 1 से 5 तारीख के बीच ही पैसा जमा करें।
  2. अगर पूरे साल की एकमुश्त राशि जमा करना संभव नहीं है, तो हर महीने की शुरुआत में निवेश करें।
  3. PPF को लंबी अवधि की योजना मानकर ही निवेश करें।
  4. समय पर निवेश करने से आपके सालभर के ब्याज में बढ़ोतरी होगी।
Next Post

Loading more posts...