प्रयागराज में जमीन विवाद ने लिया खौफनाक मोड़, बेटे ने पिता, बहन और भांजी की हत्या

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Javed Haider Zaidi

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प्रयागराज में जमीन विवाद से जुड़ी पारिवारिक हत्या मामले की जांच करती पुलिस, घटना स्थल का दृश्य

तीनों के शव कुएं से बरामद, आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पारिवारिक जमीन विवाद ने खूनी रूप ले लिया। मऊआइमा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने ही पिता, बहन और नाबालिग भांजी की हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।

घटना का पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, आरोपी युवक का अपने परिवार के साथ लंबे समय से जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते उसने पहले अपने पिता और बहन के साथ झगड़ा किया, जो बाद में हिंसक रूप में बदल गया। आरोप है कि आरोपी ने तीनों की हत्या करने के बाद शवों को छिपाने की नीयत से पास के एक कुएं में फेंक दिया।

जब कई घंटों तक पिता, बहन और भांजी का कोई पता नहीं चला तो परिवार के अन्य सदस्यों और ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद कुएं से तीनों शव बरामद किए गए।

पुलिस जांच और आरोपी की गिरफ्तारी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शुरुआती जांच में हत्या की वजह जमीन विवाद सामने आई है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वारदात की साजिश कब और कैसे रची गई।

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इलाके में मातम और आक्रोश

इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन विवाद को लेकर परिवार में पहले भी तनाव था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इतना भयावह रूप ले लेगा। लोगों में इस जघन्य अपराध को लेकर गहरा आक्रोश भी देखा जा रहा है।

सामाजिक संदेश

यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक विवाद, खासकर जमीन और संपत्ति से जुड़े मामले, अगर समय रहते बातचीत और कानूनी तरीके से न सुलझाए जाएं तो वे कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकते हैं। रिश्तों से बड़ा कोई विवाद नहीं होता, लेकिन जब लालच और गुस्सा हावी हो जाता है, तो उसका अंजाम बेहद भयावह हो सकता है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर की जाएगी।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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