नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 – आज नए साल की शुरुआत एक ऐतिहासिक और भावुक पल के साथ हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिपराहवा से प्राप्त भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों की भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। ये अस्थियां 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपराहवा में खुदाई के दौरान मिली थीं, लेकिन औपनिवेशिक काल में इन्हें भारत से दूर ले जाया गया था। अब 125 साल बाद ये भारत लौट आई हैं, जो हर भारतीय के लिए गर्व और आस्था का क्षण है।
क्यों है ये पल इतना खास और भावुक?
- ये अस्थियां भगवान बुद्ध की बताई जाती हैं, साथ ही एक बलुआ पत्थर का संदूक और सोने-चांदी के आभूषण, रत्न जैसे ऑफरिंग्स भी शामिल हैं।
- ब्रिटिश काल में खुदाई करने वाले विलियम क्लैक्सटन पेपे ने इन्हें थाईलैंड के राजा को गिफ्ट कर दिया था, कुछ हिस्सा इंग्लैंड ले जाया गया और कुछ कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में रखा गया।
- पीएम मोदी ने कहा, “गुलामी ने हमारी विरासत छीनी, लेकिन अब ये अस्थियां वापस आ गई हैं। ये न केवल धार्मिक महत्व की हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान की जीत हैं।”
- प्रदर्शनी में लाखों लोग पहुंच रहे हैं, जो शांति और करुणा के संदेश को फिर से जीवंत कर रही है। कई श्रद्धालु आंसू भरी आंखों से अस्थियों को निहार रहे हैं और कह रहे हैं – “बुद्ध भारत की आत्मा हैं, वो वापस घर लौट आए।”
यह घटना सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की खोई हुई धरोहर की वापसी की कहानी है। नए साल में यह हमें याद दिलाती है कि इतिहास की गलतियां सुधारी जा सकती हैं और आस्था की ताकत से कुछ भी संभव है।