नेपाल के भद्रपुर एयरपोर्ट पर बड़ा विमान हादसा टला, लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसला यात्री विमान

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Javed Haider Zaidi

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नेपाल के भद्रपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसला यात्री विमान, जिसमें सवार सभी यात्री और क्रू सुरक्षित रहे।

नेपाल के भद्रपुर एयरपोर्ट पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब काठमांडू से आ रहा एक यात्री विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया। विमान में 51 यात्री और 4 क्रू मेंबर सवार थे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान जैसे ही रनवे पर उतरा, अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे पार करते हुए पास के घास वाले क्षेत्र में जाकर रुक गया। घटना के तुरंत बाद एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं।

लैंडिंग के वक्त बिगड़ा संतुलन

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विमान सामान्य प्रक्रिया के तहत लैंडिंग कर रहा था, लेकिन रनवे पर टचडाउन के बाद ब्रेकिंग के दौरान विमान नियंत्रण से बाहर हो गया। पायलट ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, जिससे विमान को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया।

हवाईअड्डा अधिकारियों का कहना है कि मौसम, रनवे की स्थिति और तकनीकी कारणों—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

यात्रियों में घबराहट, लेकिन सुरक्षित निकासी

घटना के समय विमान में बैठे यात्रियों में कुछ देर के लिए डर का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें तेज झटका महसूस हुआ, लेकिन कुछ ही मिनटों में क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए यात्रियों को शांत किया

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एयरपोर्ट की रेस्क्यू टीम और दमकल विभाग की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से बाहर निकाला गया। प्राथमिक चिकित्सा के लिए मेडिकल टीम भी मौके पर मौजूद रही।

एयरलाइन और प्रशासन की प्रतिक्रिया

एयरलाइन प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा है कि

“विमान में सवार सभी यात्री और क्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”

वहीं, भद्रपुर एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर रनवे संचालन में अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं।

नेपाल में विमान सुरक्षा फिर चर्चा में

नेपाल की भौगोलिक स्थिति और सीमित रनवे वाले हवाईअड्डों को लंबे समय से विमान संचालन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। इस घटना ने एक बार फिर हवाई सुरक्षा और रनवे इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, इस मामले में बड़ा हादसा टल जाना यह दर्शाता है कि पायलट की सतर्कता और त्वरित राहत कार्य ने यात्रियों की जान बचा ली।

स्थिति सामान्य, जांच जारी

फिलहाल एयरपोर्ट पर स्थिति नियंत्रण में है। प्रभावित विमान को हटाने और रनवे की तकनीकी जांच का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी: खाड़ी देशों पर मंडराया विकिरण का खतरा

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ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि उसके महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्र पर बार-बार हमले किए जा रहे हैं, जिसके गंभीर परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर अब तक चार बार हमला किया है। उनका कहना है कि यदि इन हमलों के कारण रेडियोएक्टिव फॉलआउट (विकिरण का प्रसार) होता है, तो इसका असर ईरान की राजधानी तेहरान से ज्यादा खाड़ी देशों पर पड़ेगा।

खाड़ी देशों के लिए बड़ी चेतावनी

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि संभावित विकिरण का असर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों की राजधानियों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में वहां “जीवन पूरी तरह समाप्त हो सकता है”, जो पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ईरान का दावा: अमेरिका को हुआ नुकसान

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उन्होंने अमेरिका के दो फाइटर जेट, एक A-10 एयरक्राफ्ट, कई हेलीकॉप्टर, दो MQ-9 ड्रोन और कई क्रूज मिसाइलों को मार गिराया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

पश्चिमी देशों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति पर पश्चिमी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमलों को लेकर वही संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु संयंत्रों पर हमले न केवल सैन्य बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद खतरनाक होते हैं। यदि विकिरण फैलता है, तो इसका असर सीमाओं से परे जाकर लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

ईरान ने कहा है कि उस पर यह युद्ध थोपा गया है और वह इसका “स्थायी और सशर्त समाधान” चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्थायी युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

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