योगी आदित्यनाथ की चेतावनी: छोटे बच्चों को मोबाइल देना अपराध जैसा, भविष्य पर पड़ सकता है गहरा असर

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Javed Haider Zaidi

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योगी आदित्यनाथ गोरखपुर महोत्सव में भाषण देते हुए, बच्चों को मोबाइल देने से होने वाले नुकसान पर अभिभावकों को चेतावनी देते हुए।

योगी आदित्यनाथ की चेतावनी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल फोन की लत पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छोटे बच्चों को स्मार्टफोन थमा देना किसी अपराध से कम नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर उनके व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर पढ़ने-लिखने और रचनात्मक गतिविधियों की आदत डालें।

मंगलवार को गोरखपुर में आयोजित गोरखपुर महोत्सव को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आजकल लोग बच्चों को चुप कराने के लिए उनके हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे बच्चे को जिद्दी बना देती है और आगे चलकर वह डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं का शिकार हो सकता है।

बच्चों को मोबाइल देने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा,

“मैं देखता हूं छोटे-छोटे बच्चों को लोग स्मार्टफोन पकड़ा देते हैं। मत करिए ये, अपराध है ये। बच्चों में लिखने-पढ़ने की आदत डालिए। स्मार्टफोन पकड़ लेगा तो बच्चा जिद्दी हो जाएगा और डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।”

विशेषज्ञों की मानें तो कम उम्र में मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बच्चों की एकाग्रता, याददाश्त और सामाजिक व्यवहार को नुकसान पहुंचाता है। इससे आंखों की समस्या, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है। योगी आदित्यनाथ का कहना था कि मोबाइल की जगह बच्चों को किताबों, खेल और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

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सड़क सुरक्षा पर भी दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने केवल बच्चों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर भी लोगों को चेताया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान वाहन चलाते समय मोबाइल फोन को साइलेंट पर रखें और ईयरफोन लगाने से बचें।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़कें इसलिए बनाई जाती हैं ताकि लोग सुरक्षित और समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचें, न कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाएं आज भी बताते हुए कि नौजवानों और बच्चों की जान के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

गोरखपुर के बदलते हालात का जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के पुराने और वर्तमान हालात की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले गोरखपुर में असुरक्षा, गुंडागर्दी, गंदगी और बीमारियों का माहौल था।
योगी आदित्यनाथ के शब्दों में,

“पहले मच्छर और माफिया एक-दूसरे के पूरक थे, लेकिन अब दोनों का सफाया हो चुका है।”

उन्होंने बताया कि पहले बिजली, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी थी, लेकिन अब गोरखपुर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज उत्तर प्रदेश और खासतौर पर गोरखपुर में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिला है।

अभिभावकों से सीधी अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत में अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य उनके हाथ में है। मोबाइल फोन के बजाय उन्हें अच्छी शिक्षा, संस्कार और स्वस्थ माहौल देना ही सच्ची जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि अगर आज बच्चों को सही दिशा दी गई, तो वही बच्चे कल प्रदेश और देश का उज्ज्वल भविष्य बनेंगे।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब देशभर में बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन की लत को लेकर लगातार चिंता बढ़ती जा रही है। योगी आदित्यनाथ का यह संदेश न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के माता-पिता के लिए एक गंभीर सोच का विषय बन गया है।

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राजपाल यादव जेल में, नवाजुद्दीन सिद्दीकी पर उठे सवाल — पुराने वीडियो ने बढ़ाई बहस

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राजपाल यादव के जेल जाने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी का पुराना वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर उठे मदद को लेकर सवाल

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों एक चेक बाउंस मामले को लेकर चर्चा में हैं। कानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल जाना पड़ा। जैसे ही यह खबर सामने आई, फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच हलचल तेज हो गई। जहां कुछ कलाकार उनके समर्थन में सामने आए, वहीं सोशल मीडिया पर एक अलग ही बहस शुरू हो गई है, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी का नाम भी जुड़ गया है।

राजपाल यादव पिछले 25 साल से अधिक समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। उन्होंने कई यादगार कॉमिक किरदार निभाए हैं और अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन इन दिनों वह आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक पुराने वित्तीय विवाद और चेक बाउंस मामले में अदालत की कार्रवाई के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा।

इस बीच सोशल मीडिया पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो एक कॉमेडी शो का है, जिसमें नवाजुद्दीन अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि जब वह मुंबई में काम की तलाश कर रहे थे, तब कई बार राजपाल यादव ने उनका साथ दिया। उन्होंने कहा था कि उस दौर में कई संघर्ष कर रहे कलाकार राजपाल यादव के घर पर इकट्ठा होते थे, वहीं खाना बनता था और सब मिलकर रहते थे।

अब जब राजपाल यादव (Rajpal Yadav) मुश्किल समय से गुजर रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर कुछ लोग नवाजुद्दीन से सवाल कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जब संघर्ष के दिनों में राजपाल ने साथ दिया था, तो आज उनके कठिन समय में नवाजुद्दीन को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए। कई पोस्ट में यह भी लिखा गया कि दोस्ती और एहसान को याद रखने का यही समय है।

हालांकि, इस मामले में नवाजुद्दीन सिद्दीकी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं यह भी सच है कि किसी की निजी मदद या आर्थिक सहयोग सार्वजनिक रूप से सामने आए, यह जरूरी नहीं होता। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह दोनों पक्ष ही बेहतर जानते हैं।

दूसरी ओर, अभिनेता सोनू सूद और गुरमीत चौधरी जैसे कुछ कलाकारों ने राजपाल यादव के समर्थन में खुलकर बात की है। उन्होंने कहा है कि इंडस्ट्री को अपने साथियों के मुश्किल समय में साथ खड़ा होना चाहिए।

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि दोस्ती, संघर्ष और इंसानियत जैसे मुद्दों को भी सामने ला रहा है। राजपाल यादव का संघर्ष लोगों को भावुक कर रहा है, क्योंकि उन्होंने सालों तक दर्शकों को हंसाया है। अब उनके प्रशंसक चाहते हैं कि उनके चेहरे की मुस्कान वापस लौटे।

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