Wolf Supermoon 2026: आज रात भारत में दिखेगा अद्भुत चंद्रमा, जानें कब और कैसे देख सकेंगे

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Javed Haider Zaidi

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भारत के रात के आकाश में उगता हुआ वुल्फ सुपरमून 2026, बड़ा और चमकीला चंद्रमा, सितारों से भरा आकाश और शहर की इमारतें silhouetted, बिना किसी टेक्स्ट के।

जनवरी की पहली पूर्णिमा खगोल प्रेमियों के लिए एक खास अवसर लेकर आई है। आज रात भारत में Wolf Supermoon 2026 यानी वुल्फ सुपरमून दिखाई देगा। वुल्फ सुपरमून वह खगोलीय घटना है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और पूरी तरह से दिखाई देता है। इस बार चंद्रमा अपेक्षाकृत बड़ा, चमकीला और आकर्षक नजर आएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह रात के आकाश का दृश्य केवल खगोल प्रेमियों ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी बेहद मनोरम रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार का सुपरमून पिछले कुछ महीनों में सबसे बड़ा और चमकीला दिखाई देगा।

वुल्फ सुपरमून कब दिखाई देगा?

मौसम और खगोल विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, Wolf Supermoon 2026 3 जनवरी 2026 की रात भारत में सबसे स्पष्ट दिखाई देगा।

  • सर्वश्रेष्ठ समय: रात 9:00 बजे से 10:30 बजे तक
  • सर्वश्रेष्ठ क्षेत्र: पश्चिमी और उत्तरी भारत, जैसे दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में दृश्यता बेहतर रहेगी।
  • दक्षिणी भारत में: कुछ क्षेत्रों में हल्का बादल या कोहरा दृश्यता में बाधा डाल सकता है।

इस दौरान आसमान साफ होने पर लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का आनंद ले सकते हैं।

वुल्फ सुपरमून क्यों खास है?

  • जनवरी की पहली पूर्णिमा पर होने के कारण इसे पहला सुपरमून भी कहा जाता है।
  • चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण आकार में बड़ा और चमकीला दिखाई देगा।
  • दूरदर्शी दूरबीन या टेलीस्कोप से चंद्रमा की सतह पर मौजूद गड्ढे और पर्वत स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
  • खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह मौका साल में केवल एक बार आता है।

वुल्फ सुपरमून का नाम अमेरिकी और यूरोपीय खगोलशास्त्रियों ने दिया है, क्योंकि जनवरी में पूर्णिमा के समय भेड़ियों के उड़ते हुए चिल्लाने की प्राचीन परंपरा रही है। इसे “Wolf Moon” के नाम से भी जाना जाता है।

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भारत में देखने के सुझाव

  • खुली जगह चुनें: इमारतों और पेड़ों से दूर, खुले क्षेत्र में जाएँ।
  • उपकरण का प्रयोग करें: दूरबीन या टेलीस्कोप से चंद्रमा की सतह पर मौजूद गड्ढे और पर्वत को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है।
  • फोटोग्राफी टिप्स: ट्राइपॉड का इस्तेमाल करें, ताकि तस्वीरें स्थिर और स्पष्ट आएँ।
  • सुरक्षा ध्यान में रखें: बच्चों और बुजुर्गों के साथ इसे देखने के लिए सुरक्षित स्थान चुनें।

विशेषज्ञों की सलाह

खगोलविदों ने चेतावनी दी है कि वुल्फ सुपरमून देखने का सबसे अच्छा समय रात 9 बजे से 10:30 बजे के बीच है। मौसम साफ होने पर ही यह दृश्य पूरी तरह देखा जा सकेगा। बादल या कोहरे की स्थिति में दृश्यता सीमित हो सकती है।

सुपरमून के दौरान चंद्रमा का चमकदार आकार और रात के आकाश का दृश्य कई लोगों को मंत्रमुग्ध कर सकता है। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना है, जिसे मिस नहीं करना चाहिए।

Wolf Supermoon 2026: क्या देखें और कैसे अनुभव करें

Wolf Supermoon 2026 का अनुभव न केवल खगोल विज्ञान के छात्रों या शोधकर्ताओं के लिए, बल्कि सामान्य जनता के लिए भी अनोखा है। आप इस अवसर पर:

  • चंद्रमा की सतह के प्रमुख गड्ढे और पर्वत देख सकते हैं।
  • इसके चमकदार आकार की तुलना आम पूर्णिमा से कर सकते हैं।
  • इसे सुरक्षित दूरी से और खुले स्थान से देखकर रात का आकाश का रोमांच अनुभव कर सकते हैं।
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बाराबंकी सड़क हादसा: पल्हरी ओवरब्रिज के नीचे डंपर-ऑटो टक्कर, युवक की मौके पर मौत

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Javed Haider Zaidi

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बाराबंकी में पल्हरी ओवरब्रिज के नीचे डंपर और ऑटो रिक्शा की भीषण टक्कर के बाद क्षतिग्रस्त ऑटो और हादसे का दृश्य

बाराबंकी सड़क हादसा: जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र में रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की जान चली गई। पल्हरी ओवरब्रिज के नीचे तेज रफ्तार डंपर ने एक ऑटो रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार हादसा दोपहर करीब 12 बजे हुआ। डंपर (संख्या UP71 BT 2574) लखनऊ की ओर से सर्विस लेन होते हुए अयोध्या की दिशा में जा रहा था। इसी दौरान पल्हरी ओवरब्रिज के नीचे सामने से आ रहे ऑटो रिक्शा से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर के झटके से युवक उछलकर सड़क पर गिर पड़ा, जहां डंपर का पहिया उसके ऊपर से गुजर गया।

हादसे की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। समाचार लिखे जाने तक मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने डंपर को जब्त कर लिया है और मामले की जांच के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पल्हरी ओवरब्रिज और आसपास के क्षेत्र में तेज रफ्तार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण पहले भी कई गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर डंपरों और अन्य भारी वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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