Veer Bal Diwas: जब नन्ही उम्र में लिखा गया साहस और बलिदान का सबसे बड़ा इतिहास

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Javed Haider Zaidi

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"वीर बाल दिवस 2025: चार साहिबज़ादे वीर मुद्रा में खड़े हैं, सामने दो बच्चे अरदास करते हुए, पृष्ठभूमि में गुरुद्वारा और भारत का झंडा, भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य"

आज का दिन देश के इतिहास में एक ऐसे अध्याय की याद दिलाता है, जिसे पढ़ते हुए भी आंखें नम हो जाती हैं और सिर अपने-आप झुक जाता है। वीर बाल दिवस (Veer Bal Diwas) उन चार साहिबज़ादों की शहादत को समर्पित है, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में यह साबित कर दिया कि सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए उम्र नहीं, हौसले की जरूरत होती है।

यह दिवस सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों — साहिबज़ादा अजीत सिंह, साहिबज़ादा जुझार सिंह, साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह — के अद्वितीय बलिदान को याद करने का अवसर है।

जब इतिहास ने नन्हे कंधों पर रख दिया सबसे बड़ा इम्तिहान

सत्रहवीं शताब्दी का वह दौर आसान नहीं था। अत्याचार, जबरन धर्म परिवर्तन और डर का माहौल था। लेकिन इसी दौर में गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों ने ऐसा साहस दिखाया, जो सदियों तक मिसाल बन गया।

चमकौर के युद्ध में बड़े साहिबज़ादे अजीत सिंह और जुझार सिंह ने दुश्मन की विशाल सेना के सामने डटकर मुकाबला किया। वे जानते थे कि परिणाम क्या होगा, फिर भी उन्होंने पीछे हटने के बजाय वीरगति को अपनाया।

वहीं दूसरी ओर, सरहिंद में इतिहास का सबसे हृदयविदारक दृश्य सामने आया। मात्र 9 वर्ष और 7 वर्ष की उम्र में जोरावर सिंह और फतेह सिंह को अपने धर्म से हटने के लिए डराया-धमकाया गया। लेकिन इन नन्हे साहिबज़ादों ने झुकने से इनकार कर दिया। अंततः उन्हें दीवार में ज़िंदा चिनवा दिया गया।

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यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे बड़ी नैतिक जीतों में से एक मानी जाती है।

आज के भारत में क्यों जरूरी है वीर बाल दिवस

वीर बाल दिवस केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह आज के समय का आईना भी है। जब समाज समझौतों की राह चुनता है, तब साहिबज़ादों की शहादत याद दिलाती है कि कुछ मूल्यों की कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

आज के युवाओं के लिए यह दिन—

  • आत्मसम्मान की ताकत समझने का अवसर है
  • अन्याय के सामने खड़े होने की प्रेरणा देता है
  • यह सिखाता है कि सही और गलत के बीच चुनाव हमेशा आसान नहीं होता

देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया गया वीर बाल दिवस

वीर बाल दिवस के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में सादगी और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्कूलों में बच्चों को साहिबज़ादों की कहानी सुनाई गई, कहीं नाटक हुए तो कहीं चित्रों के ज़रिये उनके बलिदान को समझाया गया।
गुरुद्वारों में अरदास और कीर्तन के माध्यम से शहीदों को याद किया गया।

इन आयोजनों का उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी तक इतिहास की सच्ची भावना पहुंचाना रहा।

सोशल मीडिया पर भी दिखी भावनाओं की झलक

आज सोशल मीडिया पर भी वीर बाल दिवस को लेकर भावनात्मक पोस्ट देखने को मिलीं। लोग साहिबज़ादों की शहादत को याद करते हुए लिख रहे हैं कि अगर इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा साहस संभव है, तो आज का समाज भी उनसे बहुत कुछ सीख सकता है।
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एक दिन नहीं, एक सोच है वीर बाल दिवस

वीर बाल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि बलिदान और मूल्यों से बना देश है।
साहिबज़ादों की शहादत यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे हों, सच्चाई का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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