UP SIR ड्राफ्ट लिस्ट: लखनऊ में कटे 12 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम, चुनाव आयोग ने बताई बड़ी वजह

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Javed Haider Zaidi

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UP SIR draft voter list Lucknow 12 lakh voters name deleted

UP SIR ड्राफ्ट लिस्ट: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इस ड्राफ्ट लिस्ट के सामने आते ही प्रदेशभर में मतदाता आंकड़ों में आई भारी गिरावट ने सभी को चौंका दिया है। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली कमी राजधानी लखनऊ में देखने को मिली है, जहां करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं

जब SIR की प्रक्रिया की घोषणा की गई थी, उस समय लखनऊ में कुल 39.9 लाख मतदाता दर्ज थे, लेकिन अब ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 27.9 लाख रह गई है। यानी लगभग 30 प्रतिशत नामों की कटौती दर्ज की गई है।

लखनऊ में इतने बड़े पैमाने पर नाम क्यों कटे?

चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार सबसे बड़ा तकनीकी कारण यह है कि लखनऊ में 30.04% जनगणना प्रपत्र (Enumeration Forms) समय पर प्राप्त नहीं हो सके।
इन प्रपत्रों के न मिलने की वजह से बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए।

अधिकारियों का कहना है कि यह अंतिम सूची नहीं है, बल्कि केवल एक ड्राफ्ट है, जिसे आपत्तियों और दावों के बाद अपडेट किया जाएगा।

सिर्फ लखनऊ नहीं, इन जिलों में भी बड़ी गिरावट

मतदाता सूची में आई यह गिरावट केवल राजधानी तक सीमित नहीं है।

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  • वाराणसी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र):
    यहां करीब 18% मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं।
  • ललितपुर (बुंदेलखंड क्षेत्र):
    27 सितंबर 2025 तक यहां 9.5 लाख मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 8.6 लाख रह गए हैं।
    यानी लगभग 9.95% की कमी दर्ज की गई है।

इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि SIR प्रक्रिया का असर पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर देखने को मिला है।

आखिर करोड़ों नाम क्यों हटाए गए? जानिए असली वजह

बीएलओ (Booth Level Officer) की रिपोर्ट और मतदाताओं से मिले फीडबैक के आधार पर नाम हटाए जाने के तीन बड़े कारण सामने आए हैं:

  1. पलायन (Migration)
    लगभग 2.17 करोड़ मतदाताओं ने अपना निवास स्थान बदल लिया है। ऐसे मतदाता पुराने पते पर मौजूद नहीं पाए गए, जिसके चलते उनके नाम हटाए गए।
  2. मृत मतदाता
    सत्यापन के दौरान 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए, जिनके नाम सूची से हटाना आवश्यक था।
  3. डुप्लीकेट और ‘घोस्ट वोटर्स’
    करीब 25.47 लाख मामलों में एक ही मतदाता का नाम एक से अधिक जगह दर्ज पाया गया। चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे “घोस्ट वोटर्स” को हटाया गया।

इन सभी सुधारों के बाद उत्तर प्रदेश में अब कुल मतदाताओं की ड्राफ्ट संख्या 12.55 करोड़ घोषित की गई है।

अगर आपका नाम कट गया है तो क्या करें?

यदि आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और ड्राफ्ट सूची में आपका नाम नहीं दिखाई दे रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने दोबारा नाम जुड़वाने का पूरा अवसर दिया है।

आप ये कदम उठा सकते हैं:

  • चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर
  • या अपने नजदीकी बीएलओ (BLO) से संपर्क करके
  • फॉर्म 6 (नया पंजीकरण) भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं

अधिकारियों के अनुसार, सभी पात्र नागरिकों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने का पूरा मौका दिया जाएगा।

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भर्ती परीक्षाओं में जाति-धर्म पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी का सख्त निर्देश, पेपर सेटर्स पर होगी कड़ी निगरानी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भर्ती बोर्डों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म या संप्रदाय पर अमर्यादित टिप्पणी न करने का निर्देश देते हुए।

भर्ती परीक्षाओं में विवादित सवालों पर सख्ती, सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्देश केवल भर्ती बोर्डों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सभी पेपर सेटर्स तक सख्ती से पहुंचाया जाए और उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे हैबिचुअल ऑफेंडर मानते हुए तुरंत प्रतिबंधित किया जाए।

पेपर सेटर्स के एमओयू में भी शामिल होगा नियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ होने वाले समझौतों यानी एमओयू में भी इस नियम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवालों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

विवादित प्रश्नों से उपजा था आक्रोश

दरअसल हाल के समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में पूछे गए कुछ सवालों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

हाल ही में आयोजित यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े एक विकल्प को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर भी निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बदलते मौसम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी वर्षा को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फील्ड में जाकर फसलों को हुए संभावित नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कराएं।

किसानों को समय पर मिले मुआवजा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है तो उसका आकलन समय पर किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े और राहत राशि समय पर उनके खाते में पहुंच सके।

परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में सवालों की भाषा और विषयवस्तु बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें तैयार करते समय सामाजिक सौहार्द और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब भर्ती बोर्डों को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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