नई दिल्ली: भारत के विवादित छात्र नेता और शोधकर्ता उमर खालिद का नाम पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है। JNU से इतिहास में स्नातक, मास्टर्स, एमफिल और PhD की डिग्री हासिल करने वाले खालिद को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया। उनका मुक़दमा लंबित है और सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उनकी जमानत याचिका खारिज की।
उमर खालिद – संक्षिप्त जानकारी (Quick Facts)
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | Syed Umar Khalid |
| जन्म | 11 अगस्त 1987 |
| जन्म स्थान | जामिया नगर, नई दिल्ली, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| पिता | Syed Qasim Rasool Ilyas (Welfare Party of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष) |
| माता | पश्चिमी उत्तर प्रदेश से |
| शिक्षा | B.A. (DU), M.A., M.Phil., Ph.D. (JNU) |
| शोध विषय | Contesting Claims and Contingencies of the Rule on Adivasis of Jharkhand |
| पेशा | छात्र नेता, शोधकर्ता |
| वर्तमान स्थिति | तिहाड़ जेल में UAPA मुक़दमे में निरुद्ध, Trial लंबित |
| प्रमुख विवाद | JNU sedition मामला, 2020 दिल्ली दंगे साजिश आरोप |
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
उमर खालिद का जन्म 11 अगस्त 1987 को नई दिल्ली के जामिया नगर में हुआ। उनके पिता Syed Qasim Rasool Ilyas, Welfare Party of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। पिता पहले Students Islamic Movement of India (SIMI) के सदस्य थे। उनकी मां पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं।
शैक्षिक पृष्ठभूमि
- B.A. (इतिहास) – Delhi University, Kirori Mal College
- M.A., M.Phil., Ph.D. (इतिहास) – Jawaharlal Nehru University (JNU)
- PhD थीसिस: Contesting Claims and Contingencies of the Rule on Adivasis of Jharkhand
उमर खालिद ने JNU में इतिहास और समाजशास्त्र पर कई शोध पत्र प्रकाशित किए। उनका शोध झारखंड के आदिवासी इलाकों में शासन और सामाजिक संरचना पर केंद्रित था।
राजनीतिक सक्रियता और JNU कार्यक्रम
JNU में छात्र जीवन के दौरान खालिद ने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। 2016 में अफ़ज़ल गुरु की बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम और प्रदर्शन उनके लिए विवाद का विषय बने। इसके बाद उनका नाम CAA विरोधी प्रदर्शन और अन्य छात्र आंदोलनों में जुड़ा।
2020 दिल्ली दंगों का मामला और गिरफ्तारी
13 सितंबर 2020 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें UAPA के तहत गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि खालिद ने हिंसा फैलाने और दंगों की योजना बनाने में भाग लिया। चार्जशीट में लगभग 930 पेज के सबूत पेश किए गए।
खालिद और उनके वकीलों ने आरोपों को खंडित किया और मीडिया ट्रायल का विरोध करते हुए अदालत में दलील दी।
जमानत याचिकाएँ और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएँ खारिज की।
- कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उन्हें एक वर्ष तक फिर से Bail याचिका दायर नहीं करने का निर्देश दिया।
- पाँच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई।
अंतरराष्ट्रीय और सामाजिक प्रतिक्रिया
- कुछ मानवाधिकार संगठन और राजनीतिक नेता खालिद के पक्ष में हैं।
- सरकार और समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित कार्रवाई मानते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय सांसदों और मानवाधिकार समूहों ने निष्पक्ष न्याय की मांग की।
शोध और अकादमिक योगदान
उमर खालिद ने झारखंड के आदिवासी इलाकों पर गहन शोध किया और कई अकादमिक लेख प्रकाशित किए। उनका योगदान भारतीय इतिहास और समाजशास्त्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जाता है।