उदयपुर में दिल दहला देने वाला हादसा: राजस्थान के उदयपुर जिले के आदिवासी अंचल कोटड़ा क्षेत्र से बुधवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। डिंगावरी इलाके में यात्रियों से खचाखच भरी एक जीप अनियंत्रित होकर करीब 60 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मातम पसरा हुआ है।
चढ़ाई के दौरान बिगड़ा संतुलन, खाई में समाई जीप
प्राप्त जानकारी के अनुसार जीप बिलवन की ओर से कोटड़ा की तरफ जा रही थी। जैसे ही वाहन पहाड़ी चढ़ाई पर पहुंचा, अचानक ब्रेक फेल हो गए। चालक ने जीप को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन क्षमता से कहीं ज्यादा सवारियों के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ गया और जीप सड़क से फिसलकर सीधे गहरी खाई में जा गिरी। बताया जा रहा है कि हादसे के समय जीप में कुल 27 लोग सवार थे, जो तय क्षमता से कई गुना अधिक है।
मौके पर मची चीख-पुकार, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। खाई में गिरी जीप से लोगों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। किसी ने पुलिस को सूचना दी तो किसी ने एम्बुलेंस बुलाने में मदद की। थोड़ी ही देर में कोटड़ा पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद कोटड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
तीन लोगों की दर्दनाक मौत
इस हादसे में काबू पिता नरसा गरासिया, रेशमी पति वख्ता गरासिया और सुरेश पिता रोशन गरासिया की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए कोटड़ा अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया गया है। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां करुण क्रंदन का माहौल बन गया।
कोटड़ा में ओवरलोडिंग बनी जानलेवा समस्या
कोटड़ा क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी बहुल इलाका है, जहां परिवहन के सीमित साधन हैं। जानकारी के अनुसार इस इलाके में 120 से अधिक जीपें चलती हैं और इनमें से ज्यादातर जीपें रोजाना ओवरलोड होकर यात्रियों को ढोती हैं। मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। यह पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी कई बार इसी तरह की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है।
पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
लगातार हो रहे हादसों के बावजूद ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई न होना अब पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्ती बरती जाती, तो इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोका जा सकता था। आदिवासी अंचल में परिवहन नियमों की अनदेखी अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
जरूरत सख्त फैसलों और ठोस कार्रवाई की
उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा भी है। सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लोग ओवरलोड वाहनों में सफर करने को मजबूर रहेंगे? अब समय आ गया है कि प्रशासन सिर्फ जांच और बयानबाजी तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और सख्त कदम उठाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।