सीरिया: हुम्स में मस्जिद पर आत्मघाती हमले में 12 की मौत, ISIS की भूमिका पर शक

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Javed Haider Zaidi

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"सीरिया के हुम्स शहर में मस्जिद के बाहर सुरक्षा बल तैनात, आत्मघाती हमले के बाद का दृश्य, राहत और बचाव कार्य जारी, अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ स्टाइल लैंडस्केप इमेज"

सीरिया के प्रांत हुम्स में एक शांतिपूर्ण नमाज़ के दौरान दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है। एक आत्मघाती हमलावर ने स्थानीय समय अनुसार शुक्रवार की नमाज़ के दौरान मस्जिद के अंदर अपने आपको उड़ाया, जिससे कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों और अस्पताल सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि अधिकतर मृतक वहीं के ही नागरिक हैं, जो इबादत के लिए इकट्ठा हुए थे।

घटना के तुरंत बाद अस्पतालों में खून से लथपथ घायल पर्यटन ने सबसे पहले इलाज की गुहार लगाई, वहीं पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य में जुट गए।

हमले से मची दहशत और माहौल

हुम्स के इस जिलो में आधी रात से नमाज़ के समय तक अक्सर सुकून भरा माहौल रहता है, लेकिन शुक्रवार को सुबह नमाज़ के दौरान अचानक धमाके की आवाज़ ने पूरा इलाका झकझोर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, हमले की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आसपास के घरों की खिड़कियाँ तक हिल गईं।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया,

“हम लोग अपने रोज़मर्रा के काम से मस्जिद आए थे। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि इस पवित्र जगह पर ऐसा हादसा होगा। जब धमाका हुआ, तो लोग भागे, चीखें सुनकर कोई समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।”

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घायलों को पास के सरकारी अस्पताल और क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर 24 घंटे से लगातार उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं

ISIS की भूमिका पर शक, जांच जारी

स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि यह हमला ISIS जैसे कठोर विचारधारा वाले संगठन का कृत्य हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी संगठन ने आधिकारिक तौर पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा बलों को ऐसे कई सबूत मिले हैं जो ISIS के तार से जोड़ते हैं

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया,

“हम शुरुआती जांच में कुछ ऐसे सुराग भी मिला रहे हैं जो हमें इस बात की ओर ले जा रहे हैं कि ISIS का हाथ हो सकता है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने तक कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।”

सीरियाई सरकार ने भी इस मामले पर बयान जारी कर कहा है कि वह पूरे मामले की गंभीरता से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जांच कर रही है

स्थानीय समुदाय और प्रतिक्रिया

मस्जिद के इमाम और समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा कि ऐसे कृत्य भाईचारे और मानवता के खिलाफ हैं। हुम्स के स्थानीय निवासी इस घटना के बाद दुःख और गुस्से दोनों का सामना कर रहे हैं।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा,

“हम यहाँ रोज़ाना नमाज़ के लिए आते हैं, हम कोई दुश्मन नहीं हैं। किसी भी धार्मिक स्थल पर हमला करना मानवीयता के खिलाफ है।”

वहीं वैश्विक और पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया

सीरिया के इस हमले की खबर जैसे ही आई, आसपास के देशों ने भी घटनास्थल पर परिस्थितियों की निंदा की है और शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा की है और कहा है कि वैश्विक स्तर पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी देशों को मिलकर कदम उठाने की आवश्यकता है।

विशेष विश्लेषण: आतंकवाद और सामाजिक असंतुलन

विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में अभी भी आतंकवादी गतिविधियों का खतरा बना हुआ है। ISIS जैसे संगठनों की विचारधारा और हिंसक तरीके समय-समय पर स्थानीय समुदायों में भय और तनाव पैदा करते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि

  1. बेहतर सुरक्षा तंत्र बनाना
  2. स्थानीय समुदायों को संगठित करना
  3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा खुफ़िया जानकारी

इन कदमों से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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