सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों के लिए नई शर्त, अब दवाइयों पर पहले लेनी होगी ऑनलाइन मंजूरी

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

एक यात्री सऊदी अरब जाने से पहले अपने पास रखी दवाइयों और पासपोर्ट के साथ लैपटॉप पर ऑनलाइन मंजूरी फॉर्म भरते हुए, पृष्ठभूमि में मक्का का ग्रैंड मस्जिद और काबा

नई दिल्ली: सऊदी अरब की यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए एक अहम नियम लागू किया गया है। अब अगर कोई यात्री अपने साथ दवाइयां लेकर सऊदी अरब (Saudi Arabia)
जा रहा है, तो उसे यात्रा से पहले ऑनलाइन क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था उन दवाइयों पर लागू होगी जो सऊदी अरब के कानून के तहत नियंत्रित या सीमित श्रेणी में आती हैं।

बिना अनुमति ले जाना पड़ सकता है भारी

नए नियम के अनुसार, जिन भारतीय यात्रियों के पास ऐसी दवाइयां पाई जाती हैं जिनकी पहले से अनुमति नहीं ली गई है, उन्हें हवाई अड्डे पर पूछताछ, दवा जब्ती या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सऊदी प्रशासन का मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य सुरक्षा और ड्रग कंट्रोल को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

किन दवाइयों पर लागू होगा नियम

जानकारी के मुताबिक, यह नियम विशेष रूप से नशीली, मानसिक प्रभाव डालने वाली और कुछ दर्द निवारक दवाइयों पर लागू होगा। कई ऐसी दवाइयां जो भारत समेत अन्य देशों में सामान्य मानी जाती हैं, सऊदी अरब में सख्त नियमों के दायरे में आती हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया से मिलेगी राहत

यात्रियों को अब सऊदी अरब के अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी दवाइयों की जानकारी पहले से अपलोड करनी होगी। इसमें दवा का नाम, मात्रा, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और यात्रा से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। मंजूरी मिलने के बाद ही दवाइयों को साथ ले जाने की अनुमति होगी।

यात्रा से पहले जांच जरूरी

विशेषज्ञों की सलाह है कि सऊदी अरब जाने से पहले यात्री यह जरूर जांच लें कि वे जो दवाइयां साथ ले जा रहे हैं, वे वहां के नियमों के अनुसार वैध हैं या नहीं। समय रहते ऑनलाइन अनुमति लेने से एयरपोर्ट पर किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।

Also Read

हज और उमराह यात्रियों के लिए भी अहम

यह नियम खास तौर पर हज और उमराह पर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग लंबे इलाज से जुड़ी दवाइयां अपने साथ लेकर जाते हैं। प्रशासन का कहना है कि नियम का पालन करने से यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रक्रिया भी सुचारु रहेगी।

Next Post

राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

Next Post

Loading more posts...