RJD कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर, लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की उठी मांग

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Javed Haider Zaidi

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RJD कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर, जिनमें लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग की गई है। पोस्टर पर लालू यादव और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें हैं और लिखा है—‘गरीबों के मसीहा, हमारे भगवान’, समर्थकों ने भारत सरकार से सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की अपील की।

RJD कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर: बिहार की सियासत में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल Rashtriya Janata Dal (RJD) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पटना स्थित RJD कार्यालय के बाहर ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग की गई है। इन पोस्टरों में उन्हें ‘गरीबों का मसीहा’ बताते हुए भारत सरकार से देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की अपील की गई है।

पोस्टरों में लालू प्रसाद यादव के साथ संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी लगाई गई है। एक पोस्टर पर लिखा है—
“गरीबों के मसीहा, हमारे भगवान। भारत सरकार से अपने आदरणीय नेता के लिए एक मांग—लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।”
जानकारी के मुताबिक, ये पोस्टर RJD अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव राजेंद्र रजक की ओर से लगवाए गए हैं।

समाजवादी आंदोलन के नेता के रूप में पेश की जा रही दलील

RJD नेताओं और समर्थकों का कहना है कि लालू प्रसाद यादव समाजवादी आंदोलन के उन नेताओं में से हैं, जिन्होंने सामाजिक न्याय की राजनीति को जन-जन तक पहुंचाया। पार्टी का तर्क है कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित तबकों को राजनीतिक पहचान दिलाने का काम किया, जिसके चलते वे भारत रत्न जैसे सम्मान के योग्य हैं।

RJD की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि लालू यादव समाजवादी विचारधारा के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सत्ता के केंद्र में रहते हुए सामाजिक बराबरी और प्रतिनिधित्व की बात को मजबूती से उठाया।

पहले भी उठ चुकी है ऐसी मांग

यह पहला मौका नहीं है जब लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग सामने आई हो। इससे पहले भी RJD और उसके सहयोगी संगठनों की ओर से इस तरह की मांग की जाती रही है। हालांकि, पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर इस मांग को सार्वजनिक रूप से उठाना पहली बार देखा गया है, जिसने इसे राजनीतिक रूप से और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

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चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण

RJD समर्थक इस मांग को मजबूती देने के लिए यह तर्क भी दे रहे हैं कि समाजवादी पृष्ठभूमि के नेताओं—स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह और स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर—को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। दोनों को यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मिला था। ऐसे में पार्टी का कहना है कि उसी परंपरा में लालू प्रसाद यादव का नाम भी इस सम्मान के लिए विचार योग्य है।

नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग से जुड़ा संदर्भ

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) के नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग उठाई थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। हालांकि, बाद में जदयू ने इस मांग से औपचारिक दूरी बना ली थी। इसके बावजूद, बिहार की राजनीति में भारत रत्न को लेकर चल रही चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म रखा हुआ है।

राजनीतिक और सामाजिक बहस का नया दौर

लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में विचारधारा, सामाजिक न्याय और नेतृत्व की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। जहां RJD समर्थक इसे सामाजिक न्याय के प्रतीक नेता का सम्मान बताते हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रचार से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मांग सिर्फ पोस्टरों और बयानों तक सीमित रहती है या राष्ट्रीय स्तर पर कोई औपचारिक पहल का रूप लेती है।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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