भारत की पहचान बनी विशाल मूर्तियों को आकार देने वाले महान मूर्तिकार ने 100 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
नई दिल्ली। भारत के प्रसिद्ध और विश्वविख्यात मूर्तिकार राम वंजी सुतार का निधन हो गया है। उन्होंने 100 वर्ष की आयु में अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, संस्कृति और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देश ने उस कलाकार को खो दिया, जिसने अपनी कला से भारत की पहचान को दुनिया के नक्शे पर और मजबूत किया।
राम सुतार को विशेष रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिल्पकार के रूप में जाना जाता है। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा आज न केवल भारत, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है और भारतीय इंजीनियरिंग व कला कौशल का प्रतीक मानी जाती है।
मध्य प्रदेश में जन्मे राम सुतार ने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर कला की दुनिया में असाधारण मुकाम हासिल किया। उनके हाथों से बनी महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू सहित कई महान हस्तियों की प्रतिमाएं देश-विदेश में स्थापित हैं। उनकी कृतियों में केवल शिल्प नहीं, बल्कि भावनाएं और जीवंतता भी साफ दिखाई देती है।
अपने लंबे करियर के दौरान राम सुतार को पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। इसके बावजूद वे सादगी और विनम्रता के लिए जाने जाते रहे। उन्होंने आखिरी समय तक कला से जुड़ाव बनाए रखा और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बने रहे।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कह रहे हैं कि राम सुतार भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी बनाई मूर्तियां आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें जीवित रखेंगी।
राम सुतार का जाना भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी विरासत, उनकी सोच और उनकी शिल्पकला भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बनी रहेगी।