PSLV-C62 Launch Today: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। देश का भरोसेमंद प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी62 (PSLV-C62) बस कुछ ही घंटों में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरेगा। इस मिशन के जरिए अन्वेषा (EOS-N1) समेत कुल 14 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जो भारत की अंतरिक्ष तकनीक और सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देंगे।
साढ़े 22 घंटे की उलटी गिनती पूरी, लॉन्च को लेकर उत्साह चरम पर
ISRO ने रविवार को साढ़े 22 घंटे की उलटी गिनती शुरू की थी, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण सोमवार सुबह 10:18 बजे किया जाएगा। यह साल 2026 का इसरो का पहला बड़ा मिशन माना जा रहा है, जिस पर देश और दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
सबसे पहले EOS-N1, फिर 13 सह-उपग्रह
PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन के तहत सबसे पहले थाईलैंड और ब्रिटेन के सहयोग से निर्मित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके करीब 17 मिनट बाद 13 अन्य सह-उपग्रहों को सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit) में छोड़ा जाएगा।
यह मिशन इसरो की कमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें घरेलू और विदेशी उपग्रह शामिल हैं।
अन्वेषा सैटेलाइट: भारत की आंखें और तेज
इस मिशन का सबसे अहम हिस्सा है अन्वेषा सैटेलाइट, जिसे खास तौर पर उन्नत निगरानी और पृथ्वी अवलोकन के लिए डिजाइन किया गया है। अन्वेषा की मदद से सीमाओं पर गतिविधियों, सामरिक इलाकों और संदिग्ध हलचलों पर बारीकी से नजर रखी जा सकेगी।
रक्षा और सुरक्षा के लिहाज से यह सैटेलाइट भारत की स्ट्रैटेजिक सर्विलांस कैपेबिलिटी को काफी मजबूत करेगा।
स्पेनिश KID कैप्सूल भी होगा लॉन्च
इस मिशन की एक और खासियत है केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (KID) कैप्सूल। करीब 25 किलोग्राम वजनी यह कैप्सूल स्पेन के एक स्टार्टअप से जुड़ा है।
प्रक्षेपण के दो घंटे से अधिक समय बाद, रॉकेट के चौथे चरण (PS4) के अलग होने के बाद इसे स्थापित किया जाएगा। इसरो के वैज्ञानिक PS4 को दोबारा प्रणोदित कर KID कैप्सूल के पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) का प्रदर्शन भी करेंगे, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम तकनीकी प्रयोग है।
PSLV-C62 मिशन क्यों है खास?
- भारत की निगरानी और रक्षा क्षमता को नई मजबूती
- एक साथ 14 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण
- विदेशी सहयोग के साथ कमर्शियल लॉन्च
- री-एंट्री टेक्नोलॉजी का अहम प्रदर्शन
PSLV-C62 का यह प्रक्षेपण न सिर्फ इसरो की तकनीकी विश्वसनीयता को दोहराएगा, बल्कि भारत को अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और सशक्त बनाएगा। जैसे-जैसे लॉन्च का समय नजदीक आ रहा है, पूरे देश की निगाहें श्रीहरिकोटा पर टिकी हैं।