Priyanka Gandhi Vadra को असम स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त, कांग्रेस में बढ़ा उनका कद

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प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीर, राजनीतिक नेतृत्व और असम विधानसभा चुनाव में स्क्रीनिंग कमिटी अध्यक्ष के रूप में उनके बढ़ते कद को दर्शाती दृश्य

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने आगामी असम विधानसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को असम स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कदम प्रियंका गांधी के संगठन में बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है और असम में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। कांग्रेस (Congress) ने 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत कई राज्यों में स्क्रीनिंग कमिटियाँ बनाई हैं। इन कमिटी का काम संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन करना और अंतिम सूची तैयार कर केंद्रीय चुनाव समिति के समक्ष पेश करना होता है। असम में प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में यह कमिटी उम्मीदवार चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

असम में कांग्रेस की रणनीति

असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रियंका गांधी की सक्रिय भागीदारी से उम्मीदवार चयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी।

असम स्क्रीनिंग कमिटी में उनके अलावा Imran Masood (इमरान मसूद), Saptagiri Sankar Ulaka (सप्तगिरी शंकर उल्का) और श्रीवेला प्रसाद को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कमिटी का नेतृत्व उम्मीदवारों के चयन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

प्रियंका गांधी का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, यह नियुक्ति प्रियंका गांधी के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह पहली बार है जब उन्हें किसी राज्य की स्क्रीनिंग कमिटी का नेतृत्व सौंपा गया है। इसके जरिए कांग्रेस संगठन में उनके कद और भूमिका को और मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि असम जैसे महत्वपूर्ण राज्य में उनके सक्रिय नेतृत्व से कांग्रेस को रणनीतिक लाभ मिलेगा।

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अन्य राज्यों में भी सक्रियता

कांग्रेस ने असम के अलावा तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के लिए भी स्क्रीनिंग कमिटियाँ बनाई हैं। इन कमिटी का नेतृत्व अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा किया जाएगा। इसका उद्देश्य उम्मीदवार चयन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी को असम का नेतृत्व देना संगठनात्मक दृष्टि से भी रणनीतिक कदम है, जिससे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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