PM Modi ने ‘मन की बात’ में Margaret Ramtharsiem का किया जिक्र, मणिपुर की महिला उद्यमी की कहानी बनी प्रेरणा

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PM Modi mentioned Margaret Ramtharsiem in Mann Ki Baat, Manipur woman entrepreneur working with traditional handicrafts and empowering local artisans

नई दिल्ली। PM Modi ने ‘मन की बात’ में में मणिपुर की महिला उद्यमी Margaret Ramtharsiem की सराहना करते हुए उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी देश के सामने रखी। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे पारंपरिक हुनर और स्थानीय संसाधनों के जरिए Margaret ने न सिर्फ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की, बल्कि कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि Margaret Ramtharsiem ने मणिपुर की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को एक नई पहचान दी। उन्होंने स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर ऐसा मॉडल विकसित किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े और पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ा जा सका।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत की असली ताकत ऐसे ही जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार और समर्पण के साथ समाज को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने Margaret की पहल को Women Entrepreneurship, Local Innovation और Cultural Preservation का बेहतरीन उदाहरण बताया।

बताया गया कि Margaret लंबे समय से मणिपुर के चुराचांदपुर क्षेत्र में पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षित करने और उसे आजीविका से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उनकी कोशिशों से कई स्थानीय कारीगरों को स्थायी रोजगार मिला है और उनके उत्पाद अब राज्य से बाहर भी पहचान बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के जरिए देश के युवाओं और महिलाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और कौशल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास ही भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से सशक्त बनाएंगे।

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Margaret Ramtharsiem की कहानी आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो छोटे स्तर से शुरुआत कर बड़े सामाजिक बदलाव का सपना देखते हैं।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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