सरकारी आंकड़ों में सामने आया बड़ा अंतर, युवाओं में शुरुआती उत्साह तो ज़्यादा लेकिन स्कीम को अंत तक पूरा करने की दर चिंता का विषय
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम (PM Internship Scheme) को देशभर के युवाओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। लाखों छात्रों और युवाओं ने इस योजना के तहत आवेदन किया, लेकिन ताज़ा सरकारी आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि इंटर्नशिप शुरू करने और उसे पूरा करने वालों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है।
डेटा के मुताबिक, स्कीम के पहले चरण में बड़ी संख्या में इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए गए और हजारों युवाओं को ऑफर लेटर भी जारी किए गए। इसके बावजूद, केवल सीमित संख्या में उम्मीदवार ही इंटर्नशिप की पूरी अवधि पूरी कर पाए। कई मामलों में चयन के बाद उम्मीदवारों ने जॉइन ही नहीं किया, जबकि कुछ ने बीच में ही इंटर्नशिप छोड़ दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इंटर्नशिप की लोकेशन, रहने-खाने की व्यवस्था, स्टाइपेंड को लेकर असंतोष, भूमिका की स्पष्टता न होना और मार्गदर्शन की कमी जैसी समस्याएं युवाओं को बीच में ही योजना से दूर कर सकती हैं। इसके अलावा, कुछ छात्रों के लिए इंटर्नशिप की अवधि और शैक्षणिक कैलेंडर का टकराव भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है।
हालांकि, कुछ राज्यों में इंटर्नशिप पूरी करने की दर अपेक्षाकृत बेहतर दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सही प्लानिंग और स्थानीय सहयोग से योजना को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम का उद्देश्य युवाओं को वास्तविक कार्य अनुभव प्रदान करना और उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। सरकार का कहना है कि स्कीम की निगरानी लगातार की जा रही है और फीडबैक के आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि आने वाले चरणों में ज्यादा से ज्यादा युवा इंटर्नशिप को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंटर्नशिप के ढांचे को और व्यावहारिक बनाया गया, तो यह योजना देश के युवाओं के लिए रोजगार की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।