PhonePe IPO: भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी PhonePe अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट के निवेश वाली इस डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल चुकी है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी जल्द ही अपने आईपीओ पेपर्स (UDHRP) फाइल करेगी।
इस आईपीओ की खासियत यह है कि यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा, यानी इसमें फ्रेश शेयर जारी नहीं होंगे। IPO में केवल कंपनी के प्रमोटर्स अपने शेयर बेचेंगे। इसका मतलब यह है कि कंपनी इस आईपीओ से कोई नई पूंजी (primary capital) जुटाएगी नहीं।
भारत में डिजिटल पेमेंट में PhonePe की अग्रणी स्थिति
PhonePe भारत में UPI (Unified Payments Interface) लेनदेन का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। कंपनी के पास लगभग 45 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी है और यह देश के डिजिटल पेमेंट मार्केट का नेतृत्व कर रही है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में PhonePe पर लगभग 9.8 अरब ट्रांजैक्शन हुए। हर महीने औसतन 10 अरब ट्रांजैक्शन होते हैं, जिनमें करीब 12 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन शामिल है।
वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2024-25 में PhonePe का रेवेन्यू 7,115 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का डिजिटल पेमेंट व्यवसाय ही इसकी मुख्य कमाई का स्रोत है, और कुल रेवेन्यू का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी सेक्टर से आता है।
विश्लेषकों के अनुसार, PhonePe के शेयर बाजार में लिस्ट होने से भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित होगा। यह अन्य फिनटेक कंपनियों के लिए भी पब्लिक मार्केट में प्रवेश का मार्ग आसान करेगा।
PhonePe का आईपीओ देश के इतिहास के दूसरे सबसे बड़े फिनटेक आईपीओ के रूप में दर्ज होगा। अनुमान है कि यह IPO लगभग 12,000 करोड़ रुपये जुटा सकता है। तुलना के लिए, साल 2021 में पेटीएम ने अपने आईपीओ से 18,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
PhonePe के इस कदम से भारतीय डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में निवेशकों का भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ने की संभावना है।