पतंग के मांझे ने छीन ली पिता की जिंदगी : पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक नायलॉन मांझे ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बीदर जिले में 48 वर्षीय संजुकुमार की दर्दनाक मौत ने न सिर्फ उनके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, संजुकुमार रोज़ की तरह बाइक से सफर कर रहे थे। इसी दौरान सड़क पर फैला पतंग का मांझा अचानक उनके गले में फंस गया। तेज धार वाली इस डोर ने उनका गला बुरी तरह काट दिया। लहूलुहान हालत में दर्द से तड़पते हुए उन्होंने अपनी बेटी को आखिरी बार फोन किया और मदद की गुहार लगाई। कुछ ही देर बाद उनकी सांसें थम गईं।
“अगर एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती…”
परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। उनका कहना है कि अगर मेडिकल सहायता में थोड़ी भी तेजी दिखाई जाती, तो शायद संजुकुमार की जान बचाई जा सकती थी। मदद के इंतजार में कीमती मिनट निकलते चले गए और एक पिता हमेशा के लिए इस दुनिया से चला गया।
सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा
इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। परिजन और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और नायलॉन मांझे पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की। लोगों का कहना है कि हर साल इस जानलेवा डोर की वजह से कई निर्दोष लोग अपनी जान गंवा देते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने आपातकालीन सेवाओं में सुधार, एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता और मांझा बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठाई।
पुलिस की कार्रवाई
मामले में मन्ना एकहेली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होगी।
बार-बार उठता वही सवाल
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक नायलॉन मांझा लोगों की जान लेता रहेगा? क्या हर मौत के बाद सिर्फ जांच और आश्वासन ही मिलेंगे, या वाकई ऐसे कदम उठाए जाएंगे जिससे सड़कों पर चलने वाले लोग सुरक्षित रह सकें?
एक बेटी के फोन पर सुनी गई अपने पिता की आखिरी आवाज़ और एक परिवार का उजड़ जाना—यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए एक कड़ा सवाल है।