पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां एक ओर बीजेपी और जेडीयू इसे कानून और अदालत के आदेश का स्वाभाविक परिणाम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में ‘कानून बनाम राजनीति’ की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।
पप्पू यादव (Pappu Yadav) की छवि एक मुखर और जुझारू जननेता की रही है। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को केवल एक कानूनी कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
‘कानून सबके लिए बराबर है’— बीजेपी
बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर साफ शब्दों में कहा कि कानून के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। आम नागरिक हो या सांसद, सभी के लिए कानून समान है। उन्होंने कहा कि जब भी पप्पू यादव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है, वह उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं और खुद को पीड़ित के रूप में पेश करते हैं।
प्रभाकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस बार भी पप्पू यादव ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को ढाल बनाकर बचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है और इसे सियासी साजिश बताना गलत है।
‘अदालत के फैसले का सम्मान जरूरी’— जेडीयू
वहीं जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। पप्पू यादव अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे थे, इसलिए प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
नीरज कुमार ने यह भी कहा कि हर कानूनी कार्रवाई को राजनीति से जोड़ना सही नहीं है। कानून अपना काम कर रहा है और इसमें सरकार की कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
विपक्ष का आरोप, सत्ता पक्ष का पलटवार
पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं बीजेपी और जेडीयू लगातार यह दोहरा रहे हैं कि यह पूरी तरह न्यायालय के आदेश के तहत की गई कार्रवाई है।
बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव
इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में माहौल और गरमा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सत्ता पक्ष ‘कानून का राज’ होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है।