निकोलस मादुरो की जीवनी: जानिए कौन हैं वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति Nicolás Maduro और उनका राजनीतिक सफर

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Javed Haider Zaidi

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निकोलस मादुरो का राजनीतिक सफर और प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन 1962 से 2026 तक।

काराकास, वेनेजुएला: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो मोरोस की कहानी एक साधारण मजदूर से लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचने की है। उनके शासनकाल में देश ने गहरी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया। 2026 में अमेरिकी सेना द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई ने उनकी कहानी को नया मोड़ दिया है।

शुरुआती जीवन और राजनीतिक पृष्ठभूमि

निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को काराकास में एक सामान्य मजदूर परिवार में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बस ड्राइवर और ट्रेड यूनियन नेता के रूप में की।

1990 के दशक में मादुरो ने ह्यूगो चावेज़ के बोलिवेरियन आंदोलन में भाग लिया। चावेज़ के विचारों और नेतृत्व शैली से प्रेरित होकर मादुरो ने राजनीतिक रूप से तेजी से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने पार्टी में जल्दी ही अपनी स्थिति मजबूत की और चावेज़ के करीबी सहयोगी बन गएराजनीतिक करियर और राष्ट्रपति पद

2013 में ह्यूगो चावेज़ के निधन के बाद मादुरो को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया। उन्होंने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला और उसी वर्ष विशेष चुनाव में विजयी होकर राष्ट्रपति पद हासिल किया।

उनके शासनकाल में वेनेजुएला को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा:

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  • मुद्रास्फीति और आर्थिक संकट
  • खाद्य और दवा की कमी
  • बेरोज़गारी और पलायन

लाखों नागरिक देश छोड़कर चले गए।

चुनावी विवाद और आलोचना

मादुरो के शासनकाल में कई चुनावी विवाद और अंतरराष्ट्रीय आलोचना सामने आई:

  • 2013: अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभाली और चुनाव में जीत हासिल की।
  • 2018: तीसरी बार राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन चुनाव को अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और विपक्ष ने अवैध और विवादास्पद बताया।

उन पर लोकतंत्र और मानवाधिकार उल्लंघन, विपक्षी नेताओं का दमन, और मीडिया नियंत्रण के आरोप लगे।


आर्थिक और सामाजिक संकट

मादुरो के शासनकाल में वेनेजुएला ने गंभीर आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का सामना किया:

  • मुद्रास्फीति की अत्यधिक दर
  • खाद्य, पानी और दवा की कमी
  • लाखों नागरिकों का पलायन

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मादुरो के शासन की आलोचना की और कहा कि उन्होंने जनता को जीवन यापन के मूलभूत साधनों से वंचित किया।

अंतरराष्ट्रीय विवाद और अमेरिकी आरोप

मादुरो और उनकी सरकार पर कई अंतरराष्ट्रीय आरोप लगे हैं:

  • नारको-टेररिज़्म (Cartel of the Suns) संचालन
  • मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध धन का लेन-देन
  • मानवाधिकार उल्लंघन

अमेरिका और यूरोप ने मादुरो के खिलाफ कई आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए।

2026 में अमेरिकी कार्रवाई और गिरफ्तारी

3 जनवरी 2026 को अमेरिकी अधिकारियों ने घोषणा की कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि यह कार्रवाई नशीली दवा तस्करी और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा को रोकने के उद्देश्य से की गई।

अमेरिका ने मादुरो पर नारको-टेरर नेटवर्क, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध गतिविधियों के आरोप लगाए। मादुरो को न्यूयॉर्क की अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है।

आंतरिक प्रतिक्रिया

  • विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे “देश के लिए नई शुरुआत” बताया।
  • वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेलसी रोड्रिग्ज़ को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया।
  • नागरिकों और राजनीतिक विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ी और देश की स्थिति तनावपूर्ण बनी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली।

  • कुछ देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा।
  • कई देशों ने इसे वेनेजुएला में स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बताया।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले पर चर्चा हुई।

निकोलस मादुरो का निजी जीवन

मादुरो का निजी जीवन सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी वाला है। उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस राजनीतिक और सामाजिक मामलों में उनके करीबी सहयोगी रही हैं। उनकी संपत्ति और नेटवर्थ के बारे में जानकारी अनुमानित है।

Timeline of Nicolás Maduro – Key Events

  • 1962: जन्म काराकास, वेनेजुएला में
  • 1990s: ट्रेड यूनियन नेता और ह्यूगो चावेज़ के सहयोगी
  • 2013: अंतरिम राष्ट्रपति बने
  • 2013-2018: चुनावी विवाद और विपक्षी दबाव
  • 2018: तीसरी बार राष्ट्रपति चुने गए
  • 2026: अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और गिरफ्तारी
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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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