राज ठाकरे बोले महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 पर पहली प्रतिक्रिया: मराठी मानुष, भाषा और अस्मिता की लड़ाई जारी, कार्यकर्ताओं की जमकर तारीफ

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राज ठाकरे महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए

राज ठाकरे बोले महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 पर पहली प्रतिक्रिया: महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों के सामने आने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। अपने संदेश की शुरुआत उन्होंने ‘सस्नेह जय महाराष्ट्र’ से की और मनसे व शिवसेना के सभी निर्वाचित नगरसेवकों को दिल से बधाई दी।

राज ठाकरे ने कहा कि यह चुनाव आसान नहीं था। उन्होंने बताया, “अपार धनशक्ति और सत्ता की ताकत के सामने यह लड़ाई शिवशक्ति और हमारी मेहनत की परीक्षा थी। लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने जिस निष्ठा और जोश के साथ इस चुनौतीपूर्ण संघर्ष में हिस्सा लिया, वह काबिल-ए-तारीफ है। उनके प्रयासों की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है।”

हार स्वीकार, लेकिन हिम्मत नहीं हारेंगे

मनसे प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिलने का दुःख जरूर है, लेकिन हम हिम्मत हारने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारे जो नगरसेवक चुने गए हैं, वे अपने क्षेत्रों में सत्ताधारियों के लिए मजबूत चुनौती साबित होंगे। अगर मराठी मानुष के खिलाफ कुछ भी होता है, तो वे निश्चित रूप से जवाब देंगे।”

मराठी मानुष, भाषा और अस्मिता की लड़ाई

राज ठाकरे ने कहा, “हमारी लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं है। यह लड़ाई मराठी मानुष, मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है। यह हमारी पहचान है और इसी के लिए हम संघर्ष करते हैं।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे चुनाव में हुई चूक और कमजोरियों का विश्लेषण करें और भविष्य के लिए मजबूत रणनीति तैयार करें।

सत्ताधारी मराठी मानुष को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे

राज ठाकरे ने कहा कि चाहे मुंबई-मुंबई उपनगर (MMR) क्षेत्र हो या राज्य का कोई हिस्सा, सत्ताधारी और उनके संरक्षण में रहने वाले लोग मराठी मानुष को दबाने की हर कोशिश करेंगे। इसलिए मनसे को मराठी समाज के साथ मजबूती से खड़ा रहना होगा।

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उन्होंने जोर देकर कहा, “चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह कभी न भूलें कि हमारी सांस मराठी है। हमें संगठन को नए सिरे से मजबूत करना होगा और मराठी अस्मिता के लिए लगातार काम करना होगा।”

मनसे की रणनीति और आगे की दिशा

राज ठाकरे ने यह भी संकेत दिया कि आगामी समय में मनसे संगठनात्मक सुधार और रणनीतिक बदलाव के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के परिणाम से सबक लेकर संगठन अपने कार्यकर्ताओं और मराठी समाज के लिए और भी सशक्त होगा।

विश्लेषकों का कहना है कि मनसे की यह प्रतिक्रिया संगठन की लंबी लड़ाई और मराठी अस्मिता पर फोकस को दर्शाती है। राज ठाकरे ने न केवल हार स्वीकार की, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि मराठी समाज के हितों के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।

महाराष्ट्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की बढ़त के बीच मनसे ने अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश की। मनसे के लिए यह चुनौतीपूर्ण चुनाव इसलिए भी था क्योंकि बड़े दलों की धनशक्ति और राजनीतिक दबाव ने मनसे के लिए लड़ाई कठिन बना दी। बावजूद इसके राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं की मेहनत और संघर्ष की तारीफ की और मराठी अस्मिता की लड़ाई को लंबी अवधि की रणनीति के रूप में रखा।

राज ठाकरे के इस संदेश ने मनसे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उत्साहित किया है। यह संदेश यह भी दिखाता है कि राज ठाकरे और मनसे की राजनीति केवल चुनावी परिणाम तक सीमित नहीं, बल्कि मराठी समाज और उसकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा तक फैली हुई है।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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