बारामती में विमान हादसा: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का निधन

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Javed Haider Zaidi

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अजीत पवार का विमान बारामती में क्रैश हुआ, हादसे के बाद विमान आग में घिरा और आसपास धुआं उठता दिखा।

बारामती में विमान हादसा: : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार का विमान बुधवार, 28 जनवरी 2026 की सुबह बारामती में क्रैश लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजीत पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई।

हादसे का विवरण

सूत्रों के अनुसार विमान मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भर रहा था। लैंडिंग के दौरान विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान आग की लपटों में घिर गया और आसपास का इलाका धुएं से ढक गया।

कौन थे सवार

विमान में डिप्टी सीएम अजीत पवार के अलावा अन्य अधिकारी और पायलट मौजूद थे। सभी सवारियों की मौके पर ही मौत हो गई।

राजनीतिक हलचल और शोक

अजीत पवार के निधन से महाराष्ट्र में गहरा शोक व्याप्त है। राज्य और राष्ट्रीय नेताओं ने संवेदना जताई है। NCP नेताओं ने अपने वरिष्ठ नेता के निधन को राजनीतिक और व्यक्तिगत क्षति बताया।

अजित पवार का राजनीतिक सफर

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के लंबे समय से सक्रिय चेहरा रहे हैं। उन्होंने वित्त, योजना और राज्य प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका निधन राज्य और पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

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आगे की कार्रवाई

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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