लखनऊ। शेर-ए-हिंदुस्तान ख़तीब-उल-ईमान मौलाना सैयद मुज़फ़्फ़र हुसैन रिज़वी ताहिर जरवली (मरहूम) के सबसे छोटे बेटे की मजलिस-ए-सोयम गुरुवार (आज) को लखनऊ स्थित सईदुल मिल्लत हॉल, शिया पीजी कॉलेज में आयोजित की गई। मजलिस में मरहूम के बड़े बेटे मौलाना आबिस काज़िम जरवली ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए मजलिस को संबोधित किया।
अपने ख़िताब में मौलाना आबिस काज़िम जरवाली ने “हर नफ़्स को मौत का मज़ा चखना है” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृत्यु एक अटल सत्य है और इंसान को अपने जीवन को नेक आमाल, इंसाफ़ और इंसानियत के रास्ते पर चलकर सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने क़ुरआन और इस्लामी शिक्षाओं के हवाले से जीवन की अस्थायित्वता और आख़िरत की तैयारी पर ज़ोर दिया।
अहलेबैत के फ़ज़ायल और मसाएब-ए-कर्बला से भावुक हुआ माहौल
मजलिस के दौरान मौलाना आबिस काज़िम जरवली ने अहलेबैत (अ.) के फ़ज़ायल का उल्लेख करते हुए उनके किरदार और शिक्षाओं को जीवन का मार्गदर्शक बताया। ख़िताब के अंतिम हिस्से में उन्होंने कर्बला के दर्दनाक मसाएब बयान किए, जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद अज़ादार भावुक हो उठे और पूरे हॉल में ग़म और अज़ादारी का माहौल छा गया।
बड़ी संख्या में उलमा-ए-कराम और मोमिनीन की शिरकत
मजलिस में लखनऊ और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में मोमिनीन, अज़ादार और उलमा-ए-कराम मौजूद रहे। इस अवसर पर जिन प्रमुख धार्मिक विद्वानों ने शिरकत की, उनमें
मौलाना उरूजुल हसन मीसम, मौलाना मुन्तज़िर जाफ़री, मौलाना फ़रीदुल हसन, मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी, मौलाना अब्बास नासिर अबाक़ाती, मौलाना तनवीर अब्बास नजफ़ी, मौलाना मुरतज़ा नासिर अबाक़ाती, मौलाना अब्बास इरशाद नक़वी, मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी, मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना जाफ़र अब्बास, मौलाना शफ़ीक़ हुसैन शफ़क़ और मौलाना सदफ़ जौनपुरी के नाम शामिल हैं।
नौहाख़्वानी के साथ मजलिस का समापन
मजलिस के समापन के बाद अंजुमन दस्ताए ख़तीब-उल-ईमान की ओर से नौहाख़्वानी की गई। नौहों के माध्यम से शहीदाने कर्बला को याद किया गया, जिससे माहौल और अधिक ग़मगीन हो गया। अंत में मरहूम की मग़फ़िरत और शोक संतप्त परिवार को सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ के साथ मजलिस का समापन किया गया।


