लखनऊ में एक दिन, पांच मौतें: नदी, खेत और रसोई तक फैली रहस्य की कड़ी, पुलिस हर सुराग टटोल रही

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Javed Haider Zaidi

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लखनऊ में गोमती नदी, सरसों के खेत और किचन से मिले शवों के मामलों की जांच करती पुलिस

लखनऊ में एक दिन, पांच मौतें: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार का दिन उस वक्त दहशत और सवालों से भर गया, जब शहर के अलग-अलग इलाकों से एक नर कंकाल और चार शव मिलने की खबर सामने आई। नदी से लेकर खेत और एक किचन तक फैली इन घटनाओं ने पुलिस के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। हर मामला अलग है, लेकिन एक ही दिन में इतनी मौतों ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

गोमती नदी में मिले युवक और युवती के शव, पहचान अब भी रहस्य

लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र में सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्थानीय लोगों ने गोमती नदी में एक युवक और एक युवती की लाश उतराती हुई देखी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से दोनों शवों को बाहर निकाला गया।

फिलहाल दोनों मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों की मौत डूबने से हुई या इसके पीछे कोई और वजह है। आसपास के थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली जा रही है।

सरसों के खेत में मिला नर कंकाल, गांव में फैल गया सन्नाटा

दूसरी घटना ने ग्रामीण इलाके को हिला कर रख दिया। नगराम थाना क्षेत्र के ग्राम कुबेहरा में सरसों के खेत से एक नर कंकाल बरामद हुआ। खेत में कंकाल दिखते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।

कंकाल के पास से मिले कपड़ों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि यह 13 दिसंबर 2025 से लापता पूनम का हो सकता है। कंकाल जिस स्थान से मिला, वह पूनम के घर से महज 300 मीटर की दूरी पर है। यह तथ्य मामले को और गंभीर बना रहा है।

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पुरानी गुमशुदगी, नए सवाल

पूनम के पति पीतांबर ने पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों के मुताबिक, पड़ोस के एक युवक से बातचीत को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान पूनम का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया था। इसके कुछ दिन बाद पूनम अचानक लापता हो गई थी।

अब कंकाल मिलने के बाद पुलिस इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खोल चुकी है। कंकाल की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। मौत का कारण पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा।

किचन में खून, अस्पताल में मौत: बावर्ची की संदिग्ध कहानी

इसी दिन राजधानी के विभूतिखंड थाना क्षेत्र से एक और चौंकाने वाली खबर आई। एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने वाला बावर्ची एम लाल शर्मा (35) सुबह किचन में खून से सनी हालत में मिला। पास में खून लगा चाकू पड़ा था।

साथी कर्मचारियों ने उसे तुरंत लोहिया अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है। मृतक मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था और उसकी पत्नी व बेटी वहीं रहती हैं। परिजनों की ओर से फिलहाल किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

हर मामला अलग, चिंता एक जैसी

लखनऊ पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की अलग-अलग जांच की जा रही है। कहीं हत्या की आशंका है, कहीं हादसे या आत्महत्या का पहलू सामने आ रहा है। हालांकि एक ही दिन में इतनी घटनाओं ने सुरक्षा और सामाजिक हालात को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डीएनए टेस्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी। फिलहाल राजधानी में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इन रहस्यमयी मौतों के पीछे की वजह जानने को बेचैन हैं।

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भर्ती परीक्षाओं में जाति-धर्म पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी का सख्त निर्देश, पेपर सेटर्स पर होगी कड़ी निगरानी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भर्ती बोर्डों को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में जाति, धर्म या संप्रदाय पर अमर्यादित टिप्पणी न करने का निर्देश देते हुए।

भर्ती परीक्षाओं में विवादित सवालों पर सख्ती, सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्देश केवल भर्ती बोर्डों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सभी पेपर सेटर्स तक सख्ती से पहुंचाया जाए और उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की गलती करता है तो उसे हैबिचुअल ऑफेंडर मानते हुए तुरंत प्रतिबंधित किया जाए।

पेपर सेटर्स के एमओयू में भी शामिल होगा नियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को यह भी निर्देश दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ होने वाले समझौतों यानी एमओयू में भी इस नियम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवालों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

विवादित प्रश्नों से उपजा था आक्रोश

दरअसल हाल के समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में पूछे गए कुछ सवालों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

हाल ही में आयोजित यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े एक विकल्प को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश को लेकर भी निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बदलते मौसम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जारी वर्षा को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में फील्ड में जाकर फसलों को हुए संभावित नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार कराएं।

किसानों को समय पर मिले मुआवजा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है तो उसका आकलन समय पर किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े और राहत राशि समय पर उनके खाते में पहुंच सके।

परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित राहत सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में सवालों की भाषा और विषयवस्तु बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें तैयार करते समय सामाजिक सौहार्द और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब भर्ती बोर्डों को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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