लखनऊ में फर्जी दस्तावेज़ सिंडिकेट का खुलासा: बांग्लादेशी महिला के 10 सहयोगी गिरफ्तार

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Javed Haider Zaidi

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विदेशी नागरिकों को अवैध भारतीय पहचान दिलाने वाला नेटवर्क पुलिस की पकड़ में

लखनऊ में एक बड़े फर्जी पहचान दस्तावेज़ मामले का खुलासा हुआ है जिसमें पहले से गिरफ्तार बांग्लादेशी महिला के 10 और सहयोगियों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया गया है। यह गिरोह विदेशी नागरिकों को नकली आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र दिलाने में शामिल था।

संगठित गिरोह की तह तक पुलिस की निगरानी

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ में कई और नाम सामने आए हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि यह एक संगठित दस्तावेज़ निर्माण नेटवर्क हो सकता है। गिरोह ने विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से बसाने के लिए पहचान दस्तावेज़ का दुरुपयोग किया और कई मामलों में फर्जी कंपनियों और फर्जी पते का सहारा लिया।

फर्जी दस्तावेज़ और राष्ट्रीय सुरक्षा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे फर्जी दस्तावेज़ केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी हैं। जांच के दौरान डिजिटल और कागज़ी दोनों तरह के सबूत मिले हैं, जो आगे की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

गिरफ्तारियों के बाद पूछताछ और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मुख्य सरगना की तलाश में विशेष टीमों को लगाया गया है। लखनऊ पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अगर किसी को संदिग्ध गतिविधि या फर्जी दस्तावेज़ निर्माण के बारे में जानकारी है तो तुरंत संबंधित थाने या हेल्पलाइन पर सूचना दें।

फर्जी पहचान पत्र से जुड़े बड़े खुलासे

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक महिला और उसके सहयोगियों का नहीं है बल्कि यह पूरे नेटवर्क और फर्जी दस्तावेज़ सिंडिकेट की तह तक जाता है। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह के जरिए विदेशी नागरिकों को रोजगार, शिक्षा और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच दिलाने के लिए भी फर्जी पहचान पत्र बनाए जा रहे थे। पुलिस ने अभी तक कई डिजिटल डिवाइस, कागज़ी रसीदें और फर्जी पहचान पत्र जब्त किए हैं, जिनका विश्लेषण आगे चल रही जांच में किया जाएगा।

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कानूनी कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

इस प्रकार के फर्जी दस्तावेज़ घोटाले न केवल कानून के उल्लंघन के मामले हैं बल्कि यह लोगों के भरोसे और सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं। लखनऊ पुलिस की टीम ने इसे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा बताते हुए इसे जल्दी से जल्दी उजागर करने का प्रयास तेज कर दिया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा और आगे की जांच में यह देखने की कोशिश की जाएगी कि यह गिरोह कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था और इसके अन्य सदस्य कौन-कौन हैं।

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मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमला, UN से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

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इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमले पर मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान, पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वीडियो संदेश

मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित शिया मस्जिद खदीजतुल कुबरा में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नमाज़ अदा कर रहे मासूम नमाज़ियों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कई लोगों की शहादत की खबर है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

इस दर्दनाक घटना पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास (Yasoob Abbas) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हमले को इंसानियत और इस्लाम दोनों के खिलाफ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

“आतंकियों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं” — मौलाना यासूब अब्बास

मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में कहा कि जो लोग खुद को मुसलमान बताकर मस्जिदों में नमाज़ियों पर गोलियां बरसाते हैं, वे दरअसल इस्लाम के नाम पर छिपे हुए वहशी दरिंदे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम किसी भी निर्दोष की हत्या की इजाज़त नहीं देता और ऐसे कृत्य करने वालों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी आतंकवाद को और बढ़ावा दे रही है।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

AISPLB के महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती से लगातार आतंकवाद पनप रहा है और वहां अल्पसंख्यकों, खासकर शिया मुसलमानों की जान सुरक्षित नहीं है।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय मंच अब भी सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे हमले भविष्य में और भयावह रूप ले सकते हैं।

शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना

अपने बयान के अंत में मौलाना यासूब अब्बास ने हमले में शहीद हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से दुआ करते हैं कि शहीदों के परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की ताकत मिले और घायलों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ हो।

मानवता पर हमला, पूरी दुनिया के लिए चेतावनी

इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुआ यह आतंकी हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता और धार्मिक सह-अस्तित्व पर हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया, तो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक आतंकवाद और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।

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