PDA या पारिवारिक राजनीति?” लखनऊ में BJP प्रदेश अध्यक्ष के बयान से सियासी हलचल तेज

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Javed Haider Zaidi

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BJP Uttar Pradesh state president Pankaj Chaudhary addressing media in Lucknow

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी के PDA मॉडल को लेकर ऐसा सवाल खड़ा किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सपा का PDA वास्तव में सामाजिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि पारिवारिक राजनीति का विस्तार है।

बयान से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

पंकज चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी जिस PDA की बात करती है, उसकी असली तस्वीर संगठन और सत्ता के फैसलों में साफ दिखाई देती है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि पार्टी के भीतर फैसले लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि परिवार के दायरे में तय होते रहे हैं।

भाजपा बनाम सपा की राजनीति फिर आमने-सामने

प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद साफ माना जा रहा है कि आने वाले समय में PDA बनाम संगठनात्मक राजनीति बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बयान सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

चुनावी संकेत?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के बयान मतदाताओं के बीच एक साफ संदेश देने की कोशिश होते हैं—एक ओर संगठन आधारित राजनीति, दूसरी ओर परिवार केंद्रित राजनीति। यही वजह है कि यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तेजी से चर्चा में आ गया है।

सियासत और तेज होने के आसार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाज़ी और तेज हो सकती है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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