Lohri का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?: भारत में हर त्यौहार का अपना एक इतिहास और खास महत्व होता है। इनमे से एक महत्वपूर्ण और रंगीन त्यौहार है लोहड़ी। हर साल जनवरी महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोहड़ी क्यों मनाई जाती है और इसका असली महत्व क्या है? आइए जानते हैं इसके इतिहास, धार्मिक और सामाजिक महत्व को।
लोहड़ी कब मनाई जाती है?
लोहड़ी का त्यौहार माघ महीने की पूर्णिमा या उसके पहले दिन मनाया जाता है। इसे आमतौर पर 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन सर्दियों की समाप्ति और आने वाले बसंत ऋतु (वसंत ऋतु) के आगमन का संकेत माना जाता है।
लोहड़ी की रात को लोग आग के चारों ओर जमा होते हैं, और उसमें गुड़, मूंगफली, तिल और गेहूं के दाने डालकर अग्नि का पूजन करते हैं।
लोहड़ी का इतिहास और उत्पत्ति
लोहड़ी का इतिहास कई लोककथाओं और पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। कुछ प्रमुख मान्यताएँ इस प्रकार हैं:
- पौष्टिक और कृषि पर आधारित त्यौहार:
लोहड़ी मुख्य रूप से कृषक समाज का त्यौहार है। यह फसल कटाई का जश्न माना जाता है। खासकर गेहूं की फसल के लिए किसानों की मेहनत का उत्सव माना जाता है। इस दिन लोग नए बीज बोने और आने वाली फसल की अच्छी पैदावार की कामना करते हैं। - पौराणिक कथाओं से जुड़ा त्यौहार:
लोहड़ी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है हीर-रांझा की। कहा जाता है कि हीर के माता-पिता ने उसके लिए लोहड़ी के दिन विशेष अनुष्ठान किए थे। इसके अलावा कुछ मान्यताओं के अनुसार, संत सुलभ घटनाओं और अग्नि देव की पूजा भी इस दिन विशेष महत्व रखती है। - सर्दियों के समापन का प्रतीक:
लोहड़ी को सर्दियों की ठंड को अलविदा कहने और सूरज देव की पूजा करने के रूप में भी देखा जाता है। लोग आग के चारों ओर नाच-गाना करते हैं और अपनी खुशियों को साझा करते हैं।
लोहड़ी के प्रमुख रस्म और परंपराएँ
लोहड़ी के दिन कई खास परंपराएँ और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं।
- अग्नि पूजन और गाना-नाच:
लोहड़ी की सबसे बड़ी परंपरा है आग के चारों ओर इकट्ठा होना। लोग आग में तिल, मूंगफली, गुड़ डालते हैं और अग्नि देव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके साथ ही लोग पारंपरिक पंजाबी गीत गाते हैं और नाचते हैं। - तिल और गुड़ का महत्व:
तिल और गुड़ ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें अग्नि में डालने से मान्यता है कि घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। - नवविवाहितों और बच्चों के लिए खास दिन:
लोहड़ी का दिन नवविवाहित जोड़ों और नवजात बच्चों के लिए विशेष शुभ माना जाता है। लोग उन्हें आशीर्वाद देने और मिठाई बांटने की परंपरा निभाते हैं। - भांगड़ा और गिद्दा:
पंजाब की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा भांगड़ा और गिद्दा इस दिन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। ये नृत्य और संगीत लोगों में जोश और उल्लास भरते हैं।
लोहड़ी का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
लोहड़ी सिर्फ एक धार्मिक त्यौहार नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है।
- यह परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
- कृषि प्रधान समाज में यह किसानों की मेहनत का सम्मान और फसल की खुशियों का उत्सव है।
- बच्चों, नवविवाहितों और बुजुर्गों के लिए यह दिन खुशियों और आशीर्वाद का प्रतीक बनता है।
लोहड़ी 2026: कैसे मनाई जाएगी?
इस साल 13 जनवरी 2026 को लोहड़ी मनाई। लोग अपने घरों में और खेतों में आग जलाकर खुशियों का जश्न मनाएंगे। सोशल मीडिया पर भी लोग लोहड़ी के रंग-बिरंगे वीडियो और तस्वीरें साझा कर रहे हैं।