फिल्म क्रिटिक Kamaal खान ने CM Yogi से मांगी माफी, फेक पोस्ट मामले में हुई कानूनी कार्रवाई

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कमाल आर खान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम फर्जी पोस्ट शेयर की, सोशल मीडिया विवाद और माफी

Kamaal Rashid Khan  ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फेक पोस्ट पर माफी मांगी, कानूनी कार्रवाई के बाद किया सार्वजनिक बयान

लखनऊ: मशहूर फिल्म क्रिटिक और सोशल मीडिया पर्सनैलिटी Mohammed Rashid Mohammed Iqbal Kamaal (KRK) ने उत्तर प्रदेश के CM Yogi आदित्यनाथ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह कदम उस समय सामने आया जब KRK ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के खिलाफ एक फेक न्यूज पोस्ट साझा किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

फेक पोस्ट का मामला

जानकारी के अनुसार, KRK ने एक ऐसा ट्वीट किया था जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में गलत जानकारी फैला रहा था। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे गंभीरता से लिया, जिससे राजनीतिक और सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।

उत्तर प्रदेश पुलिस और कानूनी एजेंसियों ने इस मामले की जांच शुरू की और KRK को चेतावनी दी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आधिकारिक माफी पेश की। माफी में KRK ने कहा कि उनका इरादा किसी भी व्यक्ति, विशेषकर मुख्यमंत्री के खिलाफ गलत संदेश फैलाने का नहीं था और उन्होंने अपने पोस्ट को तुरंत हटा दिया।

कानूनी और सोशल मीडिया प्रतिक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए कई सामाजिक और राजनीतिक व्यक्तियों ने KRK के व्यवहार की आलोचना की। साथ ही यह भी बताया गया कि फेक न्यूज और दुष्प्रचार समाज में गलत सूचना फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर्सनैलिटीज को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सत्यापित जानकारी ही साझा करनी चाहिए।

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इसके अलावा, इस माफी के बाद KRK के फॉलोअर्स ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ ने माफी को स्वीकार किया, जबकि कुछ ने उन्हें चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी हरकत न दोहराई जाए।

सोशल मीडिया पर KRK की माफी

KRK ने अपनी माफी X (पूर्व ट्विटर) पर भी पोस्ट की है। इसे आप यहां देख सकते हैं:

KRK की X पोस्ट देखें

महत्व और संदेश

यह कदम न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर जिम्मेदारीपूर्वक जानकारी साझा करने की आवश्यकता की याद भी दिलाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में सत्य और झूठ के बीच के अंतर को समझने की दिशा में एक चेतावनी का काम करती हैं।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

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