IIT कानपुर: देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से सोमवार को एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई। संस्थान में अध्ययनरत 26 वर्षीय बीटेक छात्र की हॉस्टल के कमरे में मौत हो गई। इस घटना के बाद न केवल IIT कानपुर परिसर में, बल्कि शिक्षा जगत में भी शोक और चिंता का माहौल है।
हॉस्टल के कमरे में मिली छात्र की लाश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्र अपने हॉस्टल कमरे से लंबे समय तक बाहर नहीं आया था। साथ रहने वाले छात्रों को जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखी, तो उन्होंने इसकी सूचना हॉस्टल प्रशासन को दी। दरवाज़ा खोलने पर छात्र कमरे के अंदर मृत अवस्था में पाया गया। तुरंत पुलिस को बुलाया गया और पूरे मामले की जानकारी ली गई।
कमरे से मिला छोटा सा नोट
पुलिस को छात्र के कमरे से एक संक्षिप्त नोट भी मिला है, जिसमें उसने केवल दो शब्द लिखे थे—
“Sorry everyone…”
ये शब्द अपने आप में बहुत कुछ कह जाते हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह नोट किसी गहरे मानसिक तनाव या भावनात्मक संघर्ष की ओर इशारा करता है, हालांकि आत्महत्या के कारणों को लेकर फिलहाल कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
प्रशासन और पुलिस कर रही है जांच
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में किसी तरह की जबरन घुसपैठ या हिंसा के संकेत नहीं मिले हैं। संस्थान प्रशासन भी पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहा है।
परिवार को दी गई सूचना
घटना की जानकारी छात्र के परिवार को दे दी गई है। परिजनों के कानपुर पहुंचने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संस्थान की ओर से कहा गया है कि इस मुश्किल समय में वे परिवार के साथ खड़े हैं।
कैंपस में शोक की लहर
IIT कानपुर परिसर में इस घटना के बाद गहरा सन्नाटा है। छात्र के सहपाठी, मित्र और शिक्षक इस खबर से स्तब्ध हैं। कई छात्रों का कहना है कि मृतक शांत स्वभाव का था और पढ़ाई को लेकर गंभीर रहता था। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वह अंदर ही अंदर इस तरह के दबाव से जूझ रहा होगा।
मानसिक स्वास्थ्य पर फिर खड़े हुए सवाल
यह घटना एक बार फिर देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, अकेलापन और अपेक्षाओं के बोझ जैसे मुद्दों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकादमिक सफलता के साथ-साथ छात्रों की मानसिक सेहत पर ध्यान देना अब अनिवार्य हो गया है।
संस्थान की जिम्मेदारी और समाज का सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पढ़ाई और रैंकिंग ही नहीं, बल्कि छात्रों के भावनात्मक संतुलन, संवाद और परामर्श व्यवस्था को भी मजबूत करना समय की मांग है। समय रहते मदद और संवाद शायद कई ज़िंदगियों को बचा सकता है।
एक चुप सवाल
“Sorry everyone…” — ये दो शब्द अब सिर्फ एक नोट नहीं, बल्कि पूरे समाज से पूछा गया एक सवाल बन गए हैं। सवाल यह कि क्या हम अपने आसपास के लोगों की चुप्पी को समय रहते सुन पाते हैं?