डिंपल यादव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: ‘साजिश के तहत वोट डिलीट करा रही BJP, चुनाव आयोग कर रहा पक्षपात’

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Javed Haider Zaidi

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मैनपुरी में मीडिया से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव

समाजवादी पार्टी की सांसद Dimple Yadav (डिम्पल यादव) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में एक सोची-समझी साजिश के तहत लोगों के वोट डिलीट कराए जा रहे हैं। डिंपल यादव के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया बीजेपी के चुनावी डर का नतीजा है।

डिंपल यादव ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था होने के बजाय एक तरह से बीजेपी के लिए काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण हो चुका है और आने वाले समय में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वोट कटने की प्रक्रिया के लिए समयसीमा बढ़ाना इस बात का संकेत है कि सरकार और आयोग मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लें और अपने-अपने क्षेत्रों में बीएलओ और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहकर पूरी प्रक्रिया पर नजर रखें, ताकि किसी भी नागरिक का वोट बेवजह न कटने पाए।

ममता बनर्जी के समर्थन में सपा, बजट को बताया निराशाजनक

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग लाने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डिंपल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र का सवाल है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं क्योंकि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है।

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केंद्रीय बजट पर बोलते हुए डिंपल यादव ने इसे नीरस और आम जनता से कटे हुए फैसलों का दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग और आम परिवारों के लिए ऐसा कोई कदम नहीं है जो उन्हें राहत या खुशहाली दे सके। सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी के लिए कुछ भी ठोस नहीं है।

‘बीजेपी सरकार में ही क्यों बनती हैं विवादित फिल्में’

घूसखोर पंडित फिल्म को लेकर चल रहे विवाद पर डिंपल यादव ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसी फिल्में सिर्फ बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही क्यों बनती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देकर समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रही है और इन्हें अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

चाइनीज मांझे पर सरकार को घेरा

चाइनीज मांझे को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए डिंपल यादव ने कहा कि चाइनीज मांझा बेहद खतरनाक है और इससे लगातार जान-माल का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसे रोकना पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी है। सिर्फ चाइनीज मांझा ही नहीं, बल्कि चीन से आने वाले अन्य नुकसानदायक सामानों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

अमेरिका से ट्रेड डील पर किसानों को नुकसान का आरोप

अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है, बल्कि वे और कमजोर होंगे। सरकार कॉरपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए देश की कृषि व्यवस्था को खतरे में डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी नीति के तहत अमेरिकी बाजारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि देश के किसान संघर्ष कर रहे हैं।

यूपी और बंगाल में सपा को मजबूत जनसमर्थन का दावा

डिंपल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी आगामी चुनावों की पूरी तैयारी में जुटी हुई है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की बीजेपी सरकार पूर्ण बहुमत में नहीं है और उत्तर प्रदेश में सभी समाज के लोग एकजुट होकर सपा के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि इसी जनसमर्थन से घबराकर सरकार ने एसआईआर जैसी प्रक्रियाएं शुरू करवाई हैं।

पश्चिम बंगाल को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि ममता बनर्जी एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएंगी। डिंपल यादव ने कहा कि चाहे यूपी हो या बंगाल, बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं होने देना चाहती, लेकिन जनता सब समझ रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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