सदन में बयान से बढ़ा सियासी ताप: नीतीश कुमार के शब्दों पर रोहिणी आचार्य का तीखा पलटवार, राबड़ी देवी ने मांगा इस्तीफा

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

बिहार विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर सियासी विवाद, राबड़ी देवी और रोहिणी आचार्य की कड़ी प्रतिक्रिया, सदन में हंगामे का दृश्य।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विधान परिषद में विपक्ष की नारेबाजी से नाराज़ मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर टिप्पणी की, जिसके बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से कड़ा विरोध सामने आया। राबड़ी देवी की बेटी और RJD नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री पर संसदीय मर्यादा लांघने का आरोप लगाया, जबकि खुद राबड़ी देवी ने सरकार से इस्तीफे की मांग कर दी।

क्या है पूरा मामला
सोमवार को विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों ने लगातार नारेबाजी की। कार्यवाही में बाधा पड़ने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़क गए। इसी दौरान उन्होंने विपक्षी सदस्यों और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर इशारा करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिसे विपक्ष ने अमर्यादित और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया। बयान सामने आते ही सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई।

रोहिणी आचार्य का तीखा बयान
मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री को संसदीय भाषाई मर्यादा तोड़ने की आदत पड़ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तर्क और तथ्य कमजोर पड़ते हैं, तब भाषा की सीमाएं लांघी जाती हैं। रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री के बयानों पर नजर डालें तो महिलाओं के प्रति उनकी मानसिकता और कथनी-करनी के फर्क को समझा जा सकता है। उनके मुताबिक, महिला सम्मान पर दिए जाने वाले बयान राजनीतिक और चुनावी दिखावे से अधिक कुछ नहीं हैं।

राबड़ी देवी का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सरकार को “निकम्मी” बताते हुए कहा कि राज्य में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीब वर्ग की बेटियों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। राबड़ी देवी ने कहा कि केवल आर्थिक सहायता की घोषणाओं से महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी, उन्हें वास्तविक सुरक्षा चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग की।

राजनीतिक माहौल और आगे की राह
इस बयानबाजी के बाद बिहार की राजनीति में सियासी तापमान और बढ़ गया है। विपक्ष जहां मुख्यमंत्री से माफी और इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे सदन की अव्यवस्था और विपक्ष के हंगामे से जोड़कर देख रहा है। बजट सत्र के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, जिससे सदन की कार्यवाही और राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

Also Read

Next Post

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर उठे सवाल

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी के साइन न होने पर राजनीतिक चर्चा

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

विपक्षी सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर का रवैया सदन के संचालन में भेदभावपूर्ण रहा है और विपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया। नोटिस में स्पीकर के आचरण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।

विपक्ष का कहना है कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद 3 फरवरी को विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जिसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया है। 4 फरवरी को सत्ता पक्ष के एक सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का भी जिक्र नोटिस में है। आरोप है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद उस टिप्पणी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही स्पीकर द्वारा विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताया गया है।

हालांकि प्रस्ताव लाने वाले सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से लोकसभा स्पीकर का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता और संतुलन की कमी दिखाई दी है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ने सचिव जनरल को इसकी जांच करने और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष के पास संख्या बल न होने के बावजूद यह प्रस्ताव एक संदेश देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है और चेयर से अपेक्षा होती है कि वह सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करे।

राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहम्मद जावेद ने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने साइन नहीं किए हों, लेकिन 118 सांसदों का समर्थन अपने आप में एक मजबूत संदेश है। वहीं टीएमसी के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों के हस्ताक्षर भले ही नोटिस पर न हों, लेकिन वे विपक्ष के साथ खड़े हैं।

Next Post

Loading more posts...