Chamoli train accident: सुरंग में दो लोको ट्रेनें टकराईं, 60 से अधिक लोग घायल

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Javed Haider Zaidi

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Chamoli train accident: सुरंग में दो लोको ट्रेनें टकराईं, 60 से अधिक लोग घायल

Chamoli train accident: चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले में मंगलवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया। जिले में चल रही विष्णुगढ़–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं। इस दुर्घटना में 60 से अधिक लोग घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

हादसा उस समय हुआ जब सुरंग के भीतर एक लोको ट्रेन कर्मचारियों और अधिकारियों को लेकर आगे बढ़ रही थी, जबकि दूसरी लोको ट्रेन निर्माण सामग्री और उपकरण लेकर आ रही थी। सीमित दृश्यता और संकरे रास्ते के कारण दोनों ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिससे डिब्बों में सवार कई लोग घायल हो गए।

हादसे के बाद मची अफरा-तफरी

टक्कर के तुरंत बाद सुरंग के अंदर अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर और कर्मचारी घबराहट में इधर-उधर भागने लगे। सुरंग के अंदर अंधेरा और धूल फैलने से स्थिति और कठिन हो गई। हालांकि परियोजना प्रबंधन ने तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया और प्रशासन को सूचना दी गई।

तेजी से चला राहत और बचाव कार्य

हादसे की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंच गईं। सुरंग के अंदर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश घायलों को हल्की से मध्यम चोटें आई हैं। कुछ लोगों को हाथ-पैर में फ्रैक्चर और सिर में चोट की शिकायत है, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने सभी घायलों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की है।

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प्रशासन का बयान

चमोली जिला प्रशासन ने बताया कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खामी या आपसी समन्वय की कमी को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही होगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना स्थल पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परियोजना प्रबंधन की प्रतिक्रिया

विष्णुगढ़–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सुरंग के भीतर यातायात व्यवस्था और सिग्नल सिस्टम की दोबारा जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

परियोजना प्रबंधन ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने और उनके परिवारों को हर संभव सहायता देने की बात कही है।

स्थानीय लोगों में चिंता

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और मजदूरों के बीच चिंता का माहौल है। पहले भी इस क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की परियोजनाओं में अतिरिक्त सावधानी और सख्त निगरानी की जरूरत होती है।

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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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