एडमंटन (कनाडा): विकसित देशों की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कनाडा के Edmonton शहर में एक सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के इंतज़ार के दौरान भारतीय मूल के एक व्यक्ति की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज लगातार असहनीय दर्द की शिकायत करता रहा, लेकिन घंटों तक उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, 40 के दशक की उम्र के भारतीय मूल के व्यक्ति को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। सहकर्मी उन्हें तुरंत शहर के एक बड़े अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के बाद शुरुआती जांच तो की गई, लेकिन इसके बाद मरीज को वेटिंग एरिया में बैठने को कह दिया गया।
परिवार का कहना है कि मरीज ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कई बार बताया कि दर्द बेहद तेज है और उसकी हालत बिगड़ रही है। बावजूद इसके, उसे केवल सामान्य दर्द निवारक दवा देकर इंतज़ार करने को कहा गया। समय बीतता गया और मरीज दर्द से तड़पता रहा।
इस दौरान उसने अपने पिता को फोन कर आखिरी बार कहा—
“पापा, मैं बहुत दर्द में हूं… अब सहन नहीं हो रहा।”
यह शब्द अब परिवार के लिए एक ऐसी याद बन गए हैं, जो जिंदगी भर उनका पीछा करती रहेगी।
करीब 8 घंटे बाद, जब मरीज को आखिरकार इलाज के लिए अंदर बुलाया गया, तो उसकी हालत अचानक और बिगड़ गई। इलाज शुरू होने से पहले ही उसे दिल का दौरा पड़ा और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज मिल जाता, तो उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने इस मामले को पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली त्रासदी बताया है।
घटना के बाद स्थानीय भारतीय समुदाय में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मरीज बार-बार गंभीर दर्द की शिकायत कर रहा था, तो उसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है और Canada की इमरजेंसी हेल्थ केयर सिस्टम की आलोचना हो रही है।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है और मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है। हालांकि, अस्पताल ने इलाज से जुड़े विस्तृत तथ्यों पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।
यह घटना केवल एक परिवार का निजी दुख नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो समय पर फैसला न लेने की वजह से किसी की जिंदगी छीन सकती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या सच सामने आता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।