Budget 2026: वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman (निर्मला सीतारामन्) रविवार को अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट न केवल आर्थिक वर्ष 2026-27 का लेखा-जोखा होगा, बल्कि उम्मीद है कि यह विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम भी साबित होगा।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों ने बजट की नींव पहले ही रख दी है। इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि बजट आम आदमी के जीवन और उसकी आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
आइए आंकड़ों और मौजूदा आर्थिक हालातों के आधार पर समझते हैं कि इस बार के बजट से आम आदमी की किस्मत पर क्या असर पड़ सकता है।
1. बेरोजगारी दर में सात साल में आधी गिरावट
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय महत्वपूर्ण मोड़ पर है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, बेरोजगारी दर लगातार घट रही है।
| साल | बेरोजगारी दर |
|---|---|
| 2017-18 | 6% |
| 2018-19 | 5.8% |
| 2019-20 | 4.8% |
| 2020-21 | 4.2% |
| 2021-22 | 3.1% |
| 2022-23 | 3.2% |
| 2023-24 | 3.2% |
2017-18 में बेरोजगारी दर 6% थी, जो अब 3.2% पर स्थिर है। यह सुधार दिखाता है कि आत्मनिर्भर भारत, स्किल इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर जैसी सरकारी योजनाओं ने रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी बजट में यदि सरकार नई रोजगार योजनाओं और कौशल विकास प्रावधानों को लागू करती है, तो यह दर और कम हो सकती है। इसका सबसे बड़ा लाभ मिडिल और लोअर क्लास को मिलेगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
2. GDP की रफ्तार: भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता देश
भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) में उतार-चढ़ाव आया है, लेकिन यह देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
| साल | आर्थिक विकास दर (GDP) |
|---|---|
| 2014-15 | 7.41% |
| 2015-16 | 8% |
| 2016-17 | 8.26% |
| 2017-18 | 6.8% |
| 2018-19 | 6.53% |
| 2019-20 | 4.04% |
| 2020-21 | 7.96% |
| 2021-22 | 8.7% |
| 2022-23 | 7.2% |
| 2023-24 | 8.2% |
| 2024-25 | 6.5% |
| 2025-26 (अनुमान) | 7.4% |
विशेषज्ञों का कहना है कि GDP की यह तेज़ी उद्योगों और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की ओर संकेत करती है। यदि बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश प्रोत्साहन के लिए विशेष कदम उठाए जाते हैं, तो इसका सकारात्मक असर सीधे आम आदमी की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर पर पड़ेगा।
3. आम आदमी की आय में दोगुनी वृद्धि
पिछले 10 वर्षों में आम आदमी की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
| वित्तीय वर्ष | प्रति व्यक्ति आय (रुपए) |
|---|---|
| 2015-16 | 94,797 |
| 2024-25 | 2,00,000 (अनुमान) |
2015-16 में औसत प्रति व्यक्ति आय 94,797 रुपये थी, जो अब 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन या टैक्स रिलीफ की घोषणा होती है, तो मिडिल क्लास के हाथ में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बच सकेगा। इसका सीधा असर खुदरा, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन शैली पर पड़ेगा।
4. बजट में संभावित राहत और नई योजनाएं
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि Budget 2026 में निम्नलिखित कदम आम आदमी के लिए उपयोगी और राहत देने वाले हो सकते हैं:
- इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव – अधिक छूट, कम टैक्स।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी – मिडिल क्लास की बचत बढ़ेगी।
- स्किल इंडिया और रोजगार योजनाएं – बेरोजगारी कम होगी।
- मैन्युफैक्चरिंग और उद्योग प्रोत्साहन – GDP बढ़ेगी और नए रोजगार सृजित होंगे।
- सोशल और कल्याण योजनाओं का विस्तार – आम आदमी की जीवन गुणवत्ता में सुधार।
यदि ये उपाय बजट में शामिल होते हैं, तो साल 2026 आम आदमी के लिए सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है।
5. विशेषज्ञों का विश्लेषण
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि Budget 2026 केवल आंकड़ों और लेखा-जोखा तक सीमित नहीं होगा। इसका प्रभाव आम आदमी के जीवन पर प्रत्यक्ष रूप से दिखेगा।
विशेषज्ञों का अनुमान है:
- GDP की तेज़ी और नई निवेश योजनाएं रोजगार सृजित करेंगी।
- बढ़ती आय और कर राहत से खर्च करने की शक्ति बढ़ेगी।
- बेरोजगारी घटने से युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे।
इन सब संकेतों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि Budget 2026 आम आदमी की जेब और जीवन में बदलाव लाने की पूरी क्षमता रखता है।