Budget 2026: बजट हर साल 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है? जानिए इसकी पूरी और आसान वजह

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Javed Haider Zaidi

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1 फरवरी को संसद में पेश होते आम बजट 2026 का प्रतीकात्मक दृश्य, बजट दस्तावेज और भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी जानकारी।

Budget 2026: हर साल जब नया साल शुरू होता है, तो देश में बजट को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। सरकार आम बजट पेश करने की तैयारी करती है और आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक सभी की नजरें 1 फरवरी पर टिक जाती हैं। लेकिन बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर बजट हमेशा 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है?

इस सवाल का जवाब सिर्फ परंपरा में नहीं, बल्कि देश के वित्तीय कामकाज और समय की जरूरत में छिपा है।

बजट क्या होता है और क्यों अहम है?

बजट सरकार का सालाना लेखा-जोखा होता है। इसमें बताया जाता है कि सरकार आने वाले वित्तीय वर्ष में कितना पैसा कमाएगी और उसे किन-किन कामों पर खर्च करेगी। टैक्स, सरकारी योजनाएं, सब्सिडी, विकास कार्य और आर्थिक नीतियां—all कुछ बजट का हिस्सा होती हैं।

बजट के फैसलों का सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

भारत में बजट पेश करने की परंपरा

भारत में बजट पेश करने की परंपरा बहुत पुरानी है। अंग्रेजों के शासनकाल में बजट फरवरी के आखिरी दिनों में पेश किया जाता था। आजादी के बाद भी कई साल तक यही तरीका अपनाया गया।

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हालांकि जैसे-जैसे देश की आबादी, योजनाएं और प्रशासनिक काम बढ़े, वैसे-वैसे इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस होने लगी।

पुरानी तारीख से क्या परेशानी थी?

जब बजट फरवरी के आखिर में पेश होता था, तब संसद में उस पर चर्चा और मंजूरी में काफी समय लग जाता था। इस दौरान नया वित्त वर्ष करीब आ जाता था।

भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है। बजट देर से आने की वजह से कई बार सरकारी योजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पाती थीं और पैसों के इस्तेमाल में देरी होती थी।

1 फरवरी को बजट लाने का फैसला

इन समस्याओं को देखते हुए साल 2017 में सरकार ने बजट पेश करने की तारीख बदल दी। इसके बाद से हर साल आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा।

इसका मकसद साफ था—ताकि सरकार को बजट पर चर्चा, मंजूरी और तैयारी के लिए पूरा समय मिल सके।

1 फरवरी को बजट पेश होने के फायदे

1 फरवरी को बजट पेश होने से सरकार को लगभग दो महीने का समय मिल जाता है। इस दौरान:

  • बजट पर संसद में चर्चा पूरी हो जाती है
  • मंत्रालयों और राज्यों को तैयारी का मौका मिलता है
  • योजनाओं के लिए जरूरी पैसा समय पर तय हो जाता है

इससे 1 अप्रैल से ही नई योजनाएं बिना किसी रुकावट के शुरू हो सकती हैं।

बजट का असर किन-किन पर पड़ता है?

बजट का असर हर वर्ग पर पड़ता है।

  • नौकरीपेशा लोगों की सैलरी और टैक्स पर
  • किसानों और मजदूरों की योजनाओं पर
  • व्यापारियों और उद्योगों की नीति पर
  • छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़ी योजनाओं पर

यही वजह है कि बजट सिर्फ सरकार का दस्तावेज नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय है।

Budget 2026 से लोगों की उम्मीदें

Budget 2026 को लेकर आम लोगों को टैक्स में राहत, महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार बढ़ाने वाले कदमों की उम्मीद है। वहीं निवेशकों की नजर बचत और निवेश से जुड़े फैसलों पर बनी हुई है।

सरकार हर बजट में कोशिश करती है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ आम आदमी को भी राहत मिले।

1 फरवरी अब सिर्फ एक तारीख नहीं

आज 1 फरवरी सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं रह गई है। यह दिन देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला दिन बन चुका है। बजट को समय से पहले पेश करने की व्यवस्था ने सरकारी कामकाज को ज्यादा बेहतर और व्यवस्थित बनाया है।

अब देश की नजर इस बात पर है कि Budget 2026 में सरकार देश और आम जनता के लिए कौन से अहम फैसले लेती है।

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मथुरा में सामूहिक आत्महत्या से हिला गांव: पति-पत्नी और तीन मासूम बच्चों की जहर खाकर मौत, सुसाइड नोट और वीडियो मिले

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मथुरा के खप्परपुर गांव में एक घर के बाहर जमा भीड़ और तैनात पुलिस बल, जहां पति-पत्नी और तीन बच्चों की सामूहिक आत्महत्या की घटना सामने आई।

मथुरा जिले में एक ही परिवार के पांच लोगों की सामूहिक आत्महत्या की दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। महावन थाना क्षेत्र के खप्परपुर गांव में मंगलवार सुबह पति, पत्नी और उनके तीन छोटे बच्चों के शव घर के कमरे में मिले। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सभी ने दूध में जहर मिलाकर सेवन किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया गया।

सुबह देर तक नहीं खुला दरवाजा, तब हुआ खुलासा
जानकारी के मुताबिक, यह परिवार सोमवार रात सामान्य रूप से घर में मौजूद था। मंगलवार सुबह जब घर का दरवाजा देर तक नहीं खुला तो पड़ोसियों को शक हुआ। कई बार आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो कमरे के अंदर पति-पत्नी और तीन बच्चों के शव पड़े मिले।

दूध में मिलाया गया जहर, पोस्टमार्टम से होगी पुष्टि
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार ने रात में दूध में जहर मिलाकर पिया था। हालांकि, मौत के सटीक कारण और जहर के प्रकार की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

दीवार पर लिखा सुसाइड नोट, वीडियो भी मिला
एसएसपी श्लोक कुमार सिंह ने बताया कि जिस कमरे में यह घटना हुई, वहां दीवार पर लिखा मिला है कि परिवार अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहा है। मृतक द्वारा बनाया गया एक वीडियो भी पुलिस को मिला है। सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है और उन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मृतकों की पहचान और गांव में मातम
पुलिस के अनुसार, मृतकों में पति मनीष, पत्नी सीमा और उनके तीन बच्चे शामिल हैं—एक बेटा और दो बेटियां। घटना की खबर फैलते ही गांव में मातम पसर गया। मृतक के घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई है। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

आत्महत्या के कारणों पर सस्पेंस
फिलहाल आत्महत्या के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं। आर्थिक, पारिवारिक या अन्य किसी दबाव की बात अभी पुष्टि के साथ सामने नहीं आई है। पुलिस परिजनों, पड़ोसियों और गांव के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

जांच जारी, हर पहलू खंगाल रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और वीडियो की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। इस घटना ने न सिर्फ खप्परपुर गांव, बल्कि पूरे जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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