BMC Results 2026: बीजेपी की जीत के बाद सोशल मीडिया पर छाया ‘रसमलाई’ ट्रेंड, राज ठाकरे पर कसा गया सियासी तंज

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Javed Haider Zaidi

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“BMC Results 2026 के बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रसमलाई विवाद, बीजेपी नेताओं का राज ठाकरे पर तंज”

BMC Results 2026: बीएमसी चुनाव परिणाम 2026 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ऐतिहासिक जीत के बाद राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया का माहौल भी गर्म हो गया है। महाराष्ट्र निकाय चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिली बंपर सफलता के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अचानक ‘रसमलाई’ ट्रेंड करने लगा। यह ट्रेंड सीधे तौर पर तमिलनाडु बीजेपी नेता के. अन्नामलाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray ) के बीच चुनाव प्रचार के दौरान हुई तीखी बयानबाज़ी से जुड़ा हुआ है।

कैसे शुरू हुआ ‘रसमलाई’ विवाद?

बीएमसी चुनाव प्रचार के दौरान मुंबई पहुंचे के. अन्नामलाई ने एक जनसभा में कहा था कि मुंबई केवल महाराष्ट्र का ही नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर है। इस बयान पर राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अन्नामलाई पर तंज कसते हुए उन्हें ‘रसमलाई’ कहकर संबोधित किया और कहा था,

“तमिलनाडु से एक रसमलाई मुंबई आया है, तुम्हारा यहां क्या कनेक्शन है? हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी।”

इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया। अन्नामलाई ने इसे तमिल समुदाय का अपमान बताया और खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि के. कामराज जैसे महान नेताओं की तारीफ करने से उनकी तमिल पहचान कम नहीं हो जाती, ठीक उसी तरह मुंबई को वैश्विक शहर कहना महाराष्ट्र के योगदान को नकारना नहीं है।

अन्नामलाई का पलटवार

अन्नामलाई ने राज ठाकरे को सीधी चुनौती देते हुए कहा था,

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“मैं मुंबई आऊंगा, मेरे पैर काटकर देखो।”

उन्होंने शिवसेना और उससे जुड़े नेताओं पर लुंगी और धोती जैसे पारंपरिक परिधानों का मजाक उड़ाकर तमिलों का अपमान करने का आरोप भी लगाया। साथ ही डीएमके पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां करने वाली पार्टियों के साथ मंच साझा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बीजेपी की जीत के बाद क्यों ट्रेंड हुई ‘रसमलाई’?

महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में हुए चुनावों के नतीजों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। गठबंधन 29 में से 23 नगर निगमों में आगे निकल गया। खास बात यह रही कि मुंबई महानगरपालिका (BMC), जिस पर पिछले 25 वर्षों से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का कब्जा था, वह भी अब बीजेपी के खाते में चली गई।

इसी जीत के बाद बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर पुराने ‘रसमलाई’ बयान को याद करते हुए राज ठाकरे पर तंज कसा।

बीजेपी सांसदों का तंज

  • बेंगलुरु सेंट्रल से बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने एक्स पर रसमलाई की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “कुछ रसमलाई मंगवाई है। #BMCResults”
  • वहीं बेंगलुरु साउथ से सांसद तेजस्वी सूर्या ने पोस्ट किया, “बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने मुंबई के लिए एक मीठी रसमलाई जीत ली है।”

इन पोस्ट्स के बाद ‘रसमलाई’ शब्द सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते ट्रेंड करने लगा।

राजनीति में मिठास या तंज?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे हरियाणा चुनावों के दौरान ‘जलेबी’ राजनीतिक प्रतीक बन गई थी, वैसे ही महाराष्ट्र में ‘रसमलाई’ अब एक सियासी प्रतीक के रूप में सामने आई है। यह ट्रेंड केवल एक शब्द नहीं, बल्कि चुनावी जीत, क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक बयानबाज़ी का प्रतीक बन चुका है।

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार ने भरा नामांकन, 2028 तक तय होगा कार्यकाल; निर्विरोध चुनाव लगभग पक्का

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जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नीतीश कुमार का नामांकन दाखिल करते हुए संबंधित दस्तावेज जमा करते नेता और पार्टी कार्यकर्ता

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर सियासी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उनकी ओर से दो सेट में नामांकन पत्र जमा किए। मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार, नए अध्यक्ष का कार्यकाल 2028 तक रहेगा।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, अन्यथा नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है।

संगठनात्मक चुनाव पूरे, अब केवल औपचारिकता शेष

जेडीयू ने प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे कर लिए हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया ही बची है। 24 मार्च नाम वापसी की अंतिम तारीख है, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल किसी अन्य नेता द्वारा दावेदारी सामने नहीं आने से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन के हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि नीतीश कुमार ही पार्टी की कमान संभाले रखें। इससे साफ है कि जेडीयू फिलहाल अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

इस बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री सुर्खियों में है। साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए।

इसी कड़ी में नीतीश कुमार कई मंचों से मौजूदा गृह मंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिए हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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