भारत में हर साल 26 जनवरी को पूरे देश में गणतंत्र दिवस बड़े ही गर्व और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था और देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान में गणतंत्र दिवस कब मनाया जाता है और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है। इस खबर में इसी सवाल का विस्तार से और सरल शब्दों में जवाब दिया जा रहा है।
पाकिस्तान में 23 मार्च को मनाया जाता है गणतंत्र दिवस
भारत के विपरीत पाकिस्तान में गणतंत्र दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है। वहां इसे आमतौर पर “पाकिस्तान डे” कहा जाता है। यह दिन पाकिस्तान के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह न केवल देश के संविधान से जुड़ा है बल्कि पाकिस्तान के निर्माण की सोच और आंदोलन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
लाहौर प्रस्ताव से जुड़ा है 23 मार्च
23 मार्च 1940 को लाहौर में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का वार्षिक अधिवेशन हुआ था। इसी अधिवेशन में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे बाद में लाहौर प्रस्ताव या पाकिस्तान प्रस्ताव कहा गया।
इस प्रस्ताव में भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र की मांग रखी गई थी। यही प्रस्ताव आगे चलकर पाकिस्तान के गठन का आधार बना। इस कारण 23 मार्च को पाकिस्तान में राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा एक अहम दिन माना जाता है।
1956 में बना पाकिस्तान गणराज्य
पाकिस्तान को 14 अगस्त 1947 को आज़ादी मिली थी, लेकिन आज़ादी के बाद कई वर्षों तक देश के पास स्थायी संविधान नहीं था। आखिरकार 23 मार्च 1956 को पाकिस्तान का पहला संविधान लागू किया गया। इसी दिन देश को औपचारिक रूप से “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान” घोषित किया गया।
यहीं से पाकिस्तान एक गणराज्य बना और इसलिए 23 मार्च को उसका गणतंत्र दिवस माना जाता है।
भारत और पाकिस्तान के गणतंत्र दिवस में अंतर
भारत में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था। वहीं पाकिस्तान में संविधान लागू होने की तारीख 23 मार्च 1956 रही।
दोनों देशों का आज़ादी का इतिहास एक जैसा होने के बावजूद, उनका संवैधानिक विकास अलग-अलग रास्तों से हुआ, और यही अंतर उनके राष्ट्रीय पर्वों में भी दिखाई देता है।
पाकिस्तान में 23 मार्च का आयोजन
पाकिस्तान में 23 मार्च को राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस दिन राजधानी इस्लामाबाद में सैन्य परेड का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और देश के संस्थापकों को श्रद्धांजलि दी जाती है। स्कूलों और कॉलेजों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
भारत में 26 जनवरी का संदेश
भारत में 26 जनवरी केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का प्रतीक है। इस दिन कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड देश की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और एकता को दर्शाती है।
यह दिन हर भारतीय को संविधान के मूल्यों को याद दिलाता है।