बांग्लादेश में फिर चली गोली, NCP के केंद्रीय श्रमिक नेता पर हमला, हालात तनावपूर्ण

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बांग्लादेश में NCP के केंद्रीय श्रमिक नेता पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाई

बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक हिंसा से दहल उठा है, जहां ढाका में NCP के केंद्रीय श्रमिक नेता पर अज्ञात हमलावरों ने दिनदहाड़े गोलीबारी कर दी।

बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा एक बार फिर सामने आई है। नेशनल सिटिज़न्स पार्टी (NCP) के केंद्रीय श्रमिक संगठन के नेता पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चला दी। घटना के बाद देश के राजनीतिक और सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

घायल नेता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

घटना कैसे हुई

जानकारी के मुताबिक, यह हमला उस समय हुआ जब NCP के केंद्रीय श्रमिक नेता अपने कार्यक्रम के बाद बाहर निकले थे। तभी बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गए। गोली लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

स्थानीय लोगों की मदद से घायल नेता को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

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पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हमलावरों की पहचान की कोशिश जारी है।

अब तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

राजनीतिक हिंसा पर बढ़ती चिंता

पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाएं law and order और internal security के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

विपक्षी दलों ने इस हमले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और नेताओं की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बांग्लादेश में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा पर्याप्त है। खासकर ऐसे समय में, जब देश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं।

निष्कर्ष

NCP के केंद्रीय नेता पर हुआ यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक माहौल पर सीधा असर डालने वाली घटना मानी जा रही है। अब सबकी नजरें पुलिस जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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