राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली Aravalli Hills को लेकर चिंता अब केवल पर्यावरण विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रही। गुरुवार को राजधानी जयपुर में NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अरावली के संरक्षण की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
प्रदर्शन के दौरान “अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ” जैसे नारे गूंजते रहे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी इस मार्च में शामिल हुए। मार्च का उद्देश्य अरावली क्षेत्र में हो रहे खनन, पर्यावरणीय क्षति और हालिया कानूनी व्याख्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
पुलिस ने रोका मार्च, बढ़ा तनाव
प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन शहर के एक प्रमुख चौराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मौके पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी, हालांकि स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। सचिन पायलट ने मौके पर ही प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के जल, पर्यावरण और जीवन संतुलन की रीढ़ है। यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
युवाओं की आवाज बनी आंदोलन की ताकत
इस विरोध प्रदर्शन में सबसे बड़ी भागीदारी युवाओं की रही। कॉलेज छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए। युवाओं का कहना था कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को खत्म करना सही नहीं है।
कई छात्रों ने पोस्टर और तख्तियों के जरिए यह संदेश दिया कि अगर अरावली कमजोर हुई तो जल संकट, गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याएं और गहराएंगी। युवाओं ने सरकार से स्पष्ट नीति और स्थायी समाधान की मांग की।
अरावली क्यों है इतनी अहम?
अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के भूजल स्तर, जैव विविधता और जलवायु संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली के कमजोर होने से रेगिस्तान का विस्तार, जलस्तर में गिरावट और तापमान वृद्धि जैसी समस्याएं तेज़ हो सकती हैं।
इसी वजह से पर्यावरणविद लंबे समय से अरावली क्षेत्र में खनन और निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण की मांग करते रहे हैं।
राजनीति से आगे पर्यावरण का सवाल
हालांकि इस मुद्दे पर सियासत भी गर्माई हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि सामूहिक भविष्य का सवाल है। कांग्रेस और NSUI ने संकेत दिए हैं कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से अब तक इस प्रदर्शन पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते जनदबाव के बीच आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
अरावली को लेकर जयपुर में हुआ यह प्रदर्शन बताता है कि पर्यावरण अब केवल बहस का विषय नहीं रहा, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुका है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में अरावली संरक्षण का मुद्दा और तेज़ होगा।