Aravalli Hills: भारत के सबसे पुराने पर्वतों पर संकट, वजूद पर खतरा

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

Aravalli Hills: भारत के प्राचीन पर्वत और पर्यावरणीय संकट

Aravalli Hills सिर्फ पहाड़ नहीं हैं, बल्कि North India का natural shield हैं। लेकिन आज illegal mining, real estate और political pressure के चलते इनका अस्तित्व खतरे में है।

भारत की धरती पर कुछ जगहें ऐसी हैं जो सिर्फ पहाड़ या पर्वत नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का जीता-जागता हिस्सा हैं। Aravalli Hills इन्हीं में से एक हैं। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में फैली यह प्राचीन पर्वत श्रृंखला 7 करोड़ साल पुरानी मानी जाती है और भारत के ecosystem, water resources और biodiversity में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

लेकिन आज, इन hills का अस्तित्व खतरे में है। तेज़ urbanization, industrialization और real estate expansion ने इन्हें लगातार नुकसान पहुंचाया है।

पर्यावरणीय संकट और Illegal Mining

Aravalli की सबसे बड़ी चुनौती है illegal mining और land encroachment। पहाड़ों से अवैध खनन ने soil erosion और groundwater depletion जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा कर दी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पर्वत सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी और जल स्रोतों से जुड़ा हुआ है।

Experts भी चेतावनी देते हैं कि यदि ये गतिविधियाँ नहीं रुकीं, तो north-west India में floods, water scarcity और biodiversity loss जैसी समस्या और बढ़ सकती हैं।

Also Read

राजनीतिक माहौल और विकास की दौड़

आज का political scenario अक्सर development को environment से ऊपर रखता है। Delhi-NCR और Rajasthan में urban projects के चलते Aravalli Hills पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। Experts मानते हैं कि sustainable policies और political will के बिना इन hills को बचाना मुश्किल होगा। Local communities को इन प्रयासों में शामिल करना बेहद जरूरी है।

इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर

Aravalli सिर्फ पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह क्षेत्र ancient forts, temples और archaeological sites से भरा है। यहां के पहाड़ों और घाटियों में कई प्राचीन सभ्यताओं के निशान मिलते हैं। अगर Aravalli का संरक्षण नहीं हुआ, तो ये historical landmarks भी खतरे में पड़ सकते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व

  • Water Conservation: Aravalli बारिश का पानी रोककर underground water recharge करती हैं।
  • Air Purification: यह Delhi-NCR और आसपास के शहरों की हवा को शुद्ध रखती है।
  • Biodiversity: Aravalli में कई rare species के plants और wildlife पाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि Aravalli के नष्ट होने से north-west India के ecological balance पर गंभीर असर पड़ेगा।

स्थानीय और राष्ट्रीय प्रयास

कुछ NGOs और स्थानीय संगठन Aravalli के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहे हैं। Reforestation, anti-mining campaigns और awareness programs इसके उदाहरण हैं। लेकिन असली असर तब आएगा जब सरकार, political leadership और communities मिलकर long-term conservation plans बनाएँ।

भविष्य की चुनौतियाँ

  • Illegal mining और urban encroachment को रोकना
  • Water conservation और plant restoration
  • Urban expansion और real estate pressure से बचाव
  • Historical और cultural sites की सुरक्षा

यदि ये कदम नहीं उठाए गए, तो Aravalli Hills का existence गंभीर खतरे में होगा।

निष्कर्ष

Aravalli Hills सिर्फ पर्वत नहीं हैं। यह India’s ancient history, environmental balance और cultural heritage का प्रतीक हैं। इन hills को बचाना केवल ecological responsibility नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए moral duty भी है। आज का कदम कल के भविष्य को तय करेगा।

Next Post

वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

Picture of Javed Haider Zaidi

Javed Haider Zaidi

Share

वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Next Post

Loading more posts...