Amroha में एक आदत ने छीन ली छात्रा की जान, 11वीं की छात्रा की मौत |

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Javed Haider Zaidi

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Amroha 11th class student health deterioration due to excessive fast food consumption

11वीं की छात्रा की दर्दनाक मौत, लगातार जंक फूड खाने से आंतें हुईं क्षतिग्रस्त

Amroha: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा की मौत हो गई। डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि लगातार Fast food खाने की आदत के कारण उसकी आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः इलाज के दौरान उसकी जान चली गई।

पेट दर्द से शुरू हुई तबीयत, अस्पताल में बिगड़ी हालत

परिजनों के अनुसार छात्रा को अचानक पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। पहले उसे स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के दौरान आंतों में गंभीर संक्रमण और क्षति की बात सामने आई। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने सर्जरी की, लेकिन सुधार नहीं हुआ।

दिल्ली रेफर, इलाज के दौरान मौत

स्थिति बिगड़ने पर छात्रा को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चला, लेकिन शरीर ने जवाब दे दिया। इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

लंबे समय से फास्ट फूड खाने की आदत

परिजनों ने बताया कि छात्रा को लंबे समय से चाऊमीन, बर्गर, पिज़्ज़ा और अन्य जंक फूड खाने की आदत थी। संतुलित भोजन को लेकर समझाने की कोशिश की गई, लेकिन इसकी गंभीरता का अंदाज़ा किसी को नहीं था।

डॉक्टरों की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक फास्ट फूड और प्रोसेस्ड भोजन का सेवन पाचन तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर बच्चों और किशोरों में यह आदत आंतों में सूजन, संक्रमण और जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है।

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परिवार में मातम, इलाके में शोक

छात्रा की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। मोहल्ले में शोक का माहौल है। स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोग भी इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं।

समाज के लिए चेतावनी

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की खान-पान की आदतों पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके।


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राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई पर सस्पेंस: बेल हियरिंग आज, चेक बाउंस केस में ₹9 करोड़ बकाया पर टिकी निगाहें

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तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस केस में जमानत सुनवाई से पहले रिहाई को लेकर सस्पेंस।

राजपाल यादव: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की रिहाई को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए राजपाल यादव की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होनी है। उनके मैनेजर गोल्डी ने उम्मीद जताई है कि अदालत से राहत मिल सकती है और वह जल्द बाहर आ सकते हैं।

राजपाल यादव का नाम लंबे समय से इस वित्तीय विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। यह मामला उनकी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज से जुड़ा है। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इंडस्ट्री का साथ, परिवार की उम्मीद

राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने हालिया बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सोनू सूद, सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन, रतन जैन और वरुण धवन जैसे लोग समर्थन जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर पर दी जा रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी ने सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई है।

गोल्डी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेन-देन में समय लगता है और परिवार मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए हुए है। फरवरी के अंत में परिवार में कुछ निजी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं और सभी की इच्छा है कि राजपाल यादव तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि बेल हियरिंग तय है और अदालत के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। आरोप था कि उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

बढ़ती बकाया राशि और अदालत का रुख

जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रयास दिखाने का निर्देश दिया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने लगभग 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन अदालत ने माना कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। अतिरिक्त समय मांगने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिहाई कब तक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव को अदालत से जमानत कब तक मिल सकती है। उनके मैनेजर ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई के बाद सकारात्मक फैसला आ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, फिल्म इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन और परिवार की उम्मीदें इस कानूनी संघर्ष के बीच एक मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला ही तय करेगा कि राजपाल यादव की तिहाड़ से रिहाई कब संभव हो पाएगी।

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