बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री Khaleda Zia का निधन, उम्र 80 साल; राजनीति और नेतृत्व में योगदान अमूल्य

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Javed Haider Zaidi

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खालिदा जिया, बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री, निधन के समय की तस्वीर

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री Khaleda Zia का निधन, उम्र 80 साल; राजनीति और नेतृत्व में योगदान अमूल्य बांग्लादेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली खालिदा जिया (Khaleda Zia) का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। खालिदा जिया ने बांग्लादेश के लोकतंत्र और महिला नेतृत्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया और दशकों तक राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय भूमिका निभाई।

खालिदा जिया का राजनीतिक सफर

खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को बांग्लादेश में हुआ था। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख नेता थीं और बांग्लादेश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण मोड़ पर सक्रिय रहीं।

प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल

  • खालिदा जिया 1980 और 1990 के दशक में कई बार प्रधानमंत्री बनीं।
  • उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई नीतिगत सुधार लागू किए।
  • उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत की।

BNP में योगदान

खालिदा जिया ने BNP पार्टी को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई और पार्टी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अग्रणी बनाया। उनकी नीतियां और प्रयास आज भी पार्टी और देश में याद किए जाते हैं।

देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शोक

खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी उनके योगदान को सराहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि उनका राजनीतिक और सामाजिक योगदान बांग्लादेश के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

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खालिदा जिया का महिला नेतृत्व पर प्रभाव

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के नाते खालिदा जिया ने महिला नेतृत्व और समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के कई कार्यक्रम शुरू किए गए।

उनके निधन का असर

  • बांग्लादेश में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई।
  • BNP पार्टी और विपक्षी दलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
  • अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में उनके योगदान को सराहा गया।
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वॉशिंगटन पोस्ट की बड़ी छंटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की नौकरी गई, 12 साल का सफर अचानक थमा

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वॉशिंगटन पोस्ट की छंटनी की खबर के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर की फाइल फोटो, जो अखबार से 12 साल की सेवा के बाद नौकरी से हटाए गए।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस फैसले की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने विदेशी मामलों के पत्रकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। करीब 12 वर्षों तक अखबार से जुड़े रहने के बाद ईशान को नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस मुश्किल दौर की जानकारी दी और अपने दर्द को शब्दों में साझा किया।

एक तिहाई कर्मचारियों की छंटनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने कुल कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई हिस्से को नौकरी से निकाल दिया है। इस प्रक्रिया में अखबार का खेल विभाग बंद कर दिया गया है, जबकि कई विदेशी कार्यालयों पर भी ताले लग गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 800 पत्रकारों की टीम में से 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

ईशान थरूर ने क्या कहा

ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से हटा दिया गया है और उनके साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई बेहद प्रतिभाशाली सहकर्मियों की भी छुट्टी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन पत्रकारों के लिए गहरा दुख है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में अखबार की पहचान बनाई।
ईशान ने यह भी कहा कि लगभग 12 वर्षों तक जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे केवल सहकर्मी नहीं बल्कि दोस्त रहे, और उनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही।

‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम और पाठकों का साथ

ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से कॉलम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य दुनिया की घटनाओं और उसमें अमेरिका की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि करीब पांच लाख वफादार पाठकों ने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।

वॉशिंगटन पोस्ट में भूमिका

ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। भारतीय राजनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के दौरे पर था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछने को लेकर चर्चा में भी आए थे।

सोशल मीडिया पर समर्थन

ईशान थरूर की छंटनी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पत्रकारों और पाठकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। लोगों ने उन्हें एक बेहतरीन और गंभीर पत्रकार बताया और वॉशिंगटन पोस्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अखबार प्रबंधन की सफाई

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दुखद लेकिन जरूरी” बताया है। उनका कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, ताकि अखबार को भविष्य के लिए बेहतर दिशा दी जा सके।

मालिकाना हक और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में यह अखबार ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। तब से अखबार डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन हालिया छंटनी ने पत्रकारिता के भविष्य और मीडिया संस्थानों की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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