Lucknow: अमीनाबाद दवा थोक बाजार में अवकाश, आम लोगों को दवाओं की उपलब्धता को लेकर राहत

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लखनऊ के अमीनाबाद स्थित दवा थोक बाजार में शीतकालीन अवकाश के दौरान बंद दुकानें और शांत बाजार का दृश्य

Lucknow लखनऊ: राजधानी लखनऊ के प्रमुख व्यापारिक केंद्र अमीनाबाद स्थित दवा थोक बाजार में शीतकालीन अवकाश का ऐलान कर दिया गया है। दवा व्यापार से जुड़े संगठनों के निर्णय के बाद थोक दवा बाजार कुछ दिनों के लिए बंद रहेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि फुटकर मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे, जिससे आम जनता को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।

दवा व्यापार मंडल से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार यह फैसला व्यापारियों की सहमति से लिया गया है। हर साल सर्दियों के मौसम में थोक बाजार में अवकाश की परंपरा रही है, ताकि व्यापारी कुछ समय अपने परिवार के साथ बिता सकें और नए साल से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त कर सकें।

फुटकर दुकानों पर नहीं पड़ेगा असर

व्यापार मंडल ने साफ किया है कि थोक बाजार बंद रहने के बावजूद शहर के मेडिकल स्टोर और अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बनी रहेगी। पहले से स्टॉक रखने और आपसी समन्वय के चलते किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।

प्रशासन को दी गई सूचना

थोक बाजार बंदी की जानकारी जिला प्रशासन को भी दे दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकें।

आम लोगों से अपील

दवा व्यापार संगठनों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और जरूरत की दवाएं नजदीकी मेडिकल स्टोर से ही लें। बाजार बंदी का असर इलाज और दवा वितरण व्यवस्था पर नहीं पड़ेगा।

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हर साल लिया जाता है ऐसा फैसला

व्यापारियों का कहना है कि यह अवकाश पूरी तरह अस्थायी है और नए साल की शुरुआत के साथ ही थोक बाजार फिर से सामान्य रूप से संचालित होगा। इसका उद्देश्य सिर्फ व्यापारियों को थोड़ी राहत देना और कामकाज को व्यवस्थित करना है।

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मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमला, UN से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

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इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में आतंकी हमले पर मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान, पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वीडियो संदेश

मौलाना यासूब अब्बास का कड़ा बयान: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित शिया मस्जिद खदीजतुल कुबरा में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नमाज़ अदा कर रहे मासूम नमाज़ियों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कई लोगों की शहादत की खबर है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

इस दर्दनाक घटना पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास (Yasoob Abbas) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हमले को इंसानियत और इस्लाम दोनों के खिलाफ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

“आतंकियों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं” — मौलाना यासूब अब्बास

मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान में कहा कि जो लोग खुद को मुसलमान बताकर मस्जिदों में नमाज़ियों पर गोलियां बरसाते हैं, वे दरअसल इस्लाम के नाम पर छिपे हुए वहशी दरिंदे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम किसी भी निर्दोष की हत्या की इजाज़त नहीं देता और ऐसे कृत्य करने वालों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी आतंकवाद को और बढ़ावा दे रही है।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की मांग

AISPLB के महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती से लगातार आतंकवाद पनप रहा है और वहां अल्पसंख्यकों, खासकर शिया मुसलमानों की जान सुरक्षित नहीं है।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय मंच अब भी सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे हमले भविष्य में और भयावह रूप ले सकते हैं।

शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना

अपने बयान के अंत में मौलाना यासूब अब्बास ने हमले में शहीद हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से दुआ करते हैं कि शहीदों के परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की ताकत मिले और घायलों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ हो।

मानवता पर हमला, पूरी दुनिया के लिए चेतावनी

इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुआ यह आतंकी हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता और धार्मिक सह-अस्तित्व पर हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया, तो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक आतंकवाद और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।

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