उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया है। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को समाप्त करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 31 दिसंबर 2025 तक उन सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को तैनात किया जाए, जहाँ फिलहाल वे अनुपस्थित हैं या पद रिक्त हैं।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब प्रदेश में शैक्षिक गुणवत्ता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर चिंता बढ़ रही थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही छात्रों की क्षमता को विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निर्देश का मकसद और तात्कालिकता
अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) ने अपने पत्र में लिखा है कि
“हमारा लक्ष्य है कि किसी भी सरकारी स्कूल में शिक्षक-शून्य स्थिति न रहे और बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।”
उनके अनुसार, इस दिशा में कड़ी निगरानी और जवाबदेही की भी व्यवस्था की गई है। अगर किसी ब्लॉक, मंडल या ज़िले में यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावनाएं भी जताई गई हैं।
वर्तमान स्थिति और समस्याएं
प्रदेश के कई जिलों में आज भी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी देखी जा रही है। कुछ स्थानों पर यह कमी दीर्घकालीन रिक्तियों और स्थानांतरण प्रक्रियाओं में देरी के कारण है, वहीं कुछ जगहों पर शिक्षकों की उपस्थिति का अभाव भी पाया गया है।
एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया,
“हम लगातार शिक्षकों की रिक्तियों का आकलन कर रहे हैं और उन स्थानों पर तैनाती कर रहे हैं जहाँ सबसे अधिक जरूरत है। 31 दिसंबर की समयसीमा को देखते हुए अचानक कार्यभार बढ़ गया है, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि विभाग इसे समय से पूरा करेगा।”
शिक्षक संघ का रुख और प्रतिक्रिया
प्रदेश के सरकारी शिक्षक संघ ने भी इस निर्देश का स्वागत किया है। संघ के प्रवक्ता का कहना है कि
“हम लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि सभी स्कूलों में शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल सके। शिक्षकों की मौजूदगी से ही बच्चों को बेहतर सीखने का अवसर मिलता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर तैनाती में किसी स्तर पर कोई त्रुटि होती है, तो उसे ठीक करने के लिए सरकार को शिक्षकों के हित में और भी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
अभिभावकों और छात्रों की अपेक्षाएं
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक अभिभावक ने कहा,
“हम चाहते हैं कि हर स्कूल में शिक्षक नियमित रूप से मौजूद रहें क्योंकि यही हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य है।”
छात्रों का भी यही कहना है कि शिक्षक के मार्गदर्शन से ही वे बेहतर परिणाम प्राप्त कर पाते हैं।
आगे क्या होगा?
शिक्षा विभाग अब सभी ज़िलों में नियमित निरीक्षण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था कर रहा है ताकि 31 दिसंबर की समयसीमा से पहले इसे पूरा किया जा सके। विभागीय सूत्रों के अनुसार, हर ज़िले को इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करना होगा और इसे पूरा करने पर फ़ीडबैक देना अनिवार्य होगा।